Category: Uncategorized
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जन्नत पुकारती है!
जन्नत पुकारती है कि मैं हूँ तिरे लिए,दुनिया ब-ज़िद है मुझ से कि जन्नत करो मुझे| मुनव्वर राना
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कब तक रहें देखते एल्बम!
आज प्रस्तुत है एक नवगीत, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- कब तक रहें देखते एल्बम! बदल गया, कुछ बदल रहा हैअब पहले सा कुछ न रहा है,केवल हल्की सी छाया हैसब कुछ पल-पल छीज रहा है। हम अब भी मन में पाले हैंपहले सा होने का मतिभ्रम। सभी देखते बारी-बारीसमय बली की मीनाकारीजीवित हैं हाँ…
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पानी ने कब कहा था!
मैं ने तो तुम से की ही नहीं कोई आरज़ू,पानी ने कब कहा था कि शर्बत करो मुझे| मुनव्वर राना
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चलो कि धूप दरीचों में
उठो कि ओस की बूँदें जगा रही हैं तुम्हें,चलो कि धूप दरीचों में आ के बैठ गई| मुनव्वर राना
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आउट ऑफ स्टेशन!
फिलहाल आगरा में हूँ और इंटरनेट कनेक्शन की भी समस्या है, अतः कुछ दिन पोस्ट डालने में दिक्कत हो सकती है।कोशिश करूंगा कि जब भी संभव हो संपर्क में रहूं!
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जब तक है दिलों में !
जब तक है दिलों में सच्चाई सब नाज़-ओ-नियाज़ वहीं तक हैं,जब ख़ुद-ग़र्ज़ी आ जाती है जुल होते हैं घातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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पैमान-ए-वफ़ा भी !
जो कुछ भी ख़ुशी से होता है ये दिल का बोझ न बन जाए,पैमान-ए-वफ़ा भी रहने दो सब झूटी बातें होती हैं| आरज़ू लखनवी
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हँसने में जो आँसू !
हँसने में जो आँसू आते हैं नैरंग-ए-जहाँ बतलाते हैं,हर रोज़ जनाज़े जाते हैं हर रोज़ बरातें होती हैं| आरज़ू लखनवी