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कम्बख़्त आदमी देखो!
जो दूर जाए तो ग़म है जो पास आए तो दर्द,न जाने क्या है वो कम्बख़्त आदमी देखो| जावेद अख़्तर
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जो हो सके तो!
जो हो सके तो ज़ियादा ही चाहना मुझ को,कभी जो मेरी मोहब्बत में कुछ कमी देखो| जावेद अख़्तर
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मोहब्बतों में कहाँ!
मोहब्बतों में कहाँ अपने वास्ते फ़ुर्सत,जिसे भी चाहे वो चाहे मिरी ख़ुशी देखो| जावेद अख़्तर
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जिनके होठों पे हंसी!
आज मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से, अपने स्वर में ग़ुलाम अली साहब की गाई हुई एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ – जिनके होठों पे हंसी पांव में छाले होंगे आशा है आपको पसंद आएगी। नीचे दिए गए लिंक पर आप मेरे यूट्यूब चैनल से जुडेंगे तो अच्छा लगेगा- youtube.com/kris230450 धन्यवाद ।
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कहाँ पे लाई है तुमको!
जब आईना कोई देखो इक अजनबी देखो,कहाँ पे लाई है तुम को ये ज़िंदगी देखो| जावेद अख़्तर
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मौत ने कहा!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। कुंवर नारायण जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर नारायण जी का यह नवगीत – फ़ोन की घण्टी बजीमैंने कहा — मैं नहीं हूँऔर करवट बदल कर सो गया। दरवाज़े…
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ऊँची इमारतें तो!
ऊँची इमारतें तो बड़ी शानदार हैं, लेकिन यहाँ तो रेन-बसेरे थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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दालान पूछते हैं कि!
खम्बों पे ला के किस ने सितारे टिका दिए,दालान पूछते हैं कि दीवाने क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम
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परिंदे थे क्या हुए!
मुमकिन है कट गए हों वो मौसम की धार से,उन पर फुदकते शोख़ परिंदे थे क्या हुए| शीन काफ़ निज़ाम