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122. फिर वही दिल लाया हूँ!
आज फिर दिल की बात होनी है, वैसे तो मैं समझता हूँ कि हर दिन इसी विषय पर बात की जा सकती है। एक गीत का मुखड़ा याद आ रहा है, जिस अंदाज़ में इसे रफी साहब ने गाया है, उससे यही लगता है कि यह शम्मी कपूर जी पर फिल्माया गया होगा, शायद फिल्म…
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121. दिल ही तो है !
अगर यह पूछा जाए कि रसोई में कौन सी वस्तु, कौन सा पदार्थ सबसे महत्वपूर्ण है तो पाक कला में निपुण कोई व्यक्ति, अब महिला कहने से बच रहा हूँ, क्योंकि बड़े-बड़े ‘शेफ’ आज की तारीख में पुरुष हैं, हाँ कोई भी ऐसा व्यक्ति बता देगा कि यह वस्तु सबसे ज्यादा उपयोग में आती है…
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120. शाम और यादें!
कविताओं और फिल्मी गीतों में शाम को अक्सर यादों से जोड़ा जाता है। यह खयाल आता है कि ऐसा क्या है, जिसके कारण शाम यादों से जुड़ जाती है! यहाँ दो गीत याद आते हैं जो शाम और यादों का संबंध दर्शाते हैं। एक गीत रफी साहब का गाया हुआ, जिसकी पंक्तियां हैं- हुई शाम…
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119. धरती के कागज़ पर मेरी तस्वीर अधूरी रहनी थी!
हिंदी के एक अत्यंत श्रेष्ठ गीतकार थे श्री भारत भूषण जी, मेरठ के रहने वाले थे और काव्य मंचों पर मधुरता बिखेरते थे। मैं यह नहीं कह सकता कि वे सबसे लोकप्रिय थे, परंतु जो लोग कवि-सम्मेलनों में कविता, गीतों के आस्वादन के लिए जाते थे, उनको भारत भूषण जी के गीतों से बहुत सुकून…
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118. ये धुआं सा कहाँ से उठता है!
एक किस्सा याद आ रहा है, एक सज्जन थे, नशे के शौकीन थे, रात में सोते समय भी सिगरेट में नशा मिलाकर पीते थे, एक बार सुट्टे मारते-मारते सो गए, और बाद में अचानक उन्हें धुआं सा महसूस हुआ, कुछ देर तो सोचते रहे कि कहाँ से आ रहा है, बाद में पता चला कि…
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117. पतंगबाज़ी मुबारक!
देश में कुछ अवसरों पर पतंगबाज़ी का माहौल बनता है, जिनमें से एक शायद मकर संक्रांति का अवसर है। आज से लेकर अगले दो-तीन दिनों तक भी देश में पतंगबाज़ी का माहौल रहने वाला है। यह पतंगबाज़ी होगी विभिन्न टीवी चैनलों पर जहाँ अलग-अलग एग्ज़िट पोल विशेषज्ञ अपने-अपने चुनाव परिणाम प्रस्तुत करेंगे और असली चुनाव…
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116. फिरता है चांदनी में कोई सच डरा-डरा!
दुष्यंत कुमार जी का एक शेर है- खरगोश बनके दौड़ रहे हैं तमाम ख्वाब, फिरता है चांदनी में कोई सच डरा-डरा। यह शेर वैसे तो आपात्काल में लिखी गई उनकी गज़लों के संग्रह ‘साये में धूप’ से लिया गया है, जिस माहौल में यह शेर और भी अधिक गहन अर्थ ग्रहण करता है, परंतु यह…
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115. सुविधा की होड़ और विद्रोही मुद्राएं!
आज अपने ही एक गीत के बहाने बात कर लेता हूँ। शायद मैंने यह कविता पहले भी शेयर की हो, जब मैंने शुरू के अपने ब्लॉग, अपने जीवन के विभिन्न चरणों के बहाने, अपने बचपन से प्रारंभ करके लिखे थे, उस समय तो यहाँ ब्लॉग की साइट पर मैं खुद ही लिखने वाला और खुद…
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114. वो कर रहा था मुरव्वत भी दिल्लगी की तरह!
कुछ विषय ऐसे हैं, कि जब आपके पास बात करने के लिए कोई विषय न हो, तब आप इनको लेकर अपना स्वेटर या कहें कि आलेख बुन सकते हैं। जैसे एक विषय है मौसम, दूसरा है प्यार! वैसे प्यार कौन नहीं करता और किसका काम चल पाता है बिना प्यार के? लेकिन कविता, गीत, शायरी…
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सुप्रभात
रंग पैराहन का, खुशबू ज़ुल्फ लहराने का नाम, मौसम-ए-गुल है तुम्हारे बाम पर आने का नाम। आपका दिन शुभ हो।