Category: Uncategorized
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211. ओल्डमैन्ज़ डे ऑउट इन लंदन!
जैसा मैंने पहले बताया था, हम एक माह के लिए लंदन आए हुए हैं, यहाँ थेम्स नदी के किनारे पर अपने बेटे-बहू के घर में रह रहे हैं, घर की एक तरफ जिधर थेम्स नदी बहती है, उधर कांच की ही दीवार, दरवाजा है, दिन भर नावें और छोटे-मोटे शिप दिखाई देते रहते हैं। नदी…
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85. ये दिल्ली है बाबू!
बिना किसी बहाने के, लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- दिल्ली में मेरा जन्म हुआ, 30 वर्ष की आयु तक मैं दिल्ली में ही रहा, शुरू की 2-3 नौकरियां भी वहीं कीं और सेवानिवृत्ति के बाद भी लगभग 7 वर्ष तक, दिल्ली के पास गुड़गांव में रहा। इसलिए कह सकता…
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210.जब मिलेगी, रोशनी मुझसे मिलेगी!
आज स्व. रामावतार त्यागी जी का एक गीत शेयर करने का मन हो रहा है। श्री त्यागी जी जुझारु किस्म के गीतकार थे, कवि का स्वाभिमान और आत्म सम्मान उनकी रचनाओं में खूब अभिव्यक्त होता है। इस गीत में भी उनकी पहचान के अनुरूप सशक्त और प्रभावी अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। प्रस्तुत है श्री…
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84. जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को, मिल जाए तरुवर की छाया !
नया दिन, नई जगह, जी हाँ लंदन में थेम्स नदी के किनारे का घर, जहाँ मुझे एक महीना रहना है। लेकिन काम वही पुराना, आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- एनटीपीसी में अपनी सेवा के दौरान बहुत से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन से जुड़ा रहा और इस सिलसिले में अनेक जाने-माने…
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83. काम नए नित गीत बनाना!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट, फर्क इतना है कि आज का यह ब्लॉग मैं लंदन में, थेम्स नदी के एक किनारे पर, मेरे बेटे-बहू के घर बैठकर शेयर कर रहा हूँ। घर में नदी की तरफ, दीवार के स्थान पर शीशे का दरवाजा और खिड़कियां हैं, जहाँ से वाटरबोट, छोटे-…
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209. एक सूचना, अपडेट
नमस्कार ब्लॉग लिखते एक वर्ष से ज्यादा हो गया, शुरू में आधे से अधिक ब्लॉग जब लिखे तब बहुत कम लोगों से जुड़ा था, सो पुराने ब्लॉग भी अक्सर दोहराता रहता हूँ, क्योंकि अधिकांश लोगों ने वो नहीं पढ़े हैं। शुरू में कुछ समय गुड़गांव में रहते हुए ब्लॉग लिखे, उसके बाद गोआ आ गया…
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82. कल और आएंगे, नगमों की खिलती कलियां चुनने वाले!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट, कवियों, साहित्यकारों और राजनीतिज्ञों को हल्का सा स्पर्श करते हुए- अज्ञेय जी की एक कविता है-‘नए कवि से’, काफी लंबी कविता है, उसका कुछ हिस्सा यहाँ उद्धृत कर रहा हूँ- आ, तू आ, हाँ, आ, मेरे पैरों की छाप-छाप पर रखता पैर, मिटाता उसे, मुझे…
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80. एक सपने का अंत!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट। मैंने यह पोस्ट एक घटना के आधार पर लिखी थी जो इस पोस्ट में स्पष्ट है- डॉ. कुंवर बेचैन की लिखी पंक्तियां हैं- विरहिन की मांग सितारे नहीं संजो सकते प्रेम के सूत्र नज़ारे नहीं पिरो सकते, मेरी कुटिया से ये माना कि महल ऊंचे…
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79. मत्स्य कन्या!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट। मैंने शायद दो ही ऐसी पोस्ट लिखी थीं जो रहस्य से भरी थीं। उनको ही क्रम से प्रस्तुत कर रहा हूँ, आज उनमें से दूसरी पोस्ट पेश है- अपने मित्र के दादाजी का सुनाया हुआ एक और किस्सा आपसे शेयर कर रहा हूँ, जैसा मैंने…
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78. इच्छाधारी सर्प!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट। मैंने शायद दो ही ऐसी पोस्ट लिखी थीं जो रहस्य से भरी थीं। उनको ही क्रम से प्रस्तुत कर रहा हूँ, आज उनमें से पहली पोस्ट पेश है- आज एक वृतांत सुना रहा हूँ जो मैंने दिल्ली में अपने एक मित्र और सहकर्मी से सुना…