Category: Uncategorized
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225. ‘गो’ फिर ‘आ’- गोआ!
एक महीने के प्रवास के बाद लंदन से लौटकर गोआ आ गए। जेटलेग का प्रभाव भी समाप्त हो रहा है, वैसे मुझे लगता है कि ऐसे स्थान पर, इतना लंबा समय रहकर आओ तो जेटलेग शरीर से ज्यादा मन पर होता है। एक दूसरी ही दुनिया है लंदन या कहें कि ब्रिटेन, पता ही नहीं…
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94. मैं अपने साये से कल रात डर गया यारो!
एक बार फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट, बस शीर्षक लाइन बदल दी है- आज शहरयार जी की एक गज़ल के बहाने आज के हालात पर चर्चा कर लेते हैं। इससे पहले दुश्यंत जी के एक शेर को एक बार फिर याद कर लेता हूँ- इस शहर में वो कोई बारात हो या वारदात अब किसी…
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93. मेरी बेबाक तबीयत का तकाज़ा है कुछ और!
लीजिए जी लंदन आउट, गोआ इन, हाँ जी मैं लौटकर गोआ वापस आ गया हूँ, क्योंकि बुद्धू हो या होशियार सबको लौटकर वापस आना पड़ता है। इस बारे में वैसे बेहतर कथन यह है- ‘जैसे उड़ि जहाज का पंछी, पुनि जहाज पर आवे’! हाँ तो, आज के लिए फिर से आसान वाला रास्ता चुन रहा…
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224. लंदन छूटा जाय!
एक महीने के प्रवास के बाद कल सुबह लंदन छोड़ देंगे। कल दोपहर की फ्लाइट यहाँ से है, सो सुबह ही घर छोड़ देंगे, हाँ उस समय जब भारत में दोपहर होती है। फिर मुंबई होते हुए, परसों सुबह गोआ पहुंचेंगे। बहुत लंबे समय तक यमुना मैया के पास, दिल्ली में यमुना पार- शाहदरा…
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223. लंदन की खुरचन!
शीर्षक पढ़कर आप सोच सकते हैं कि मैं किस डिश, किस व्यंजन की बात कर रहा हूँ और क्या ऐसी कोई डिश भी लंदन की विशेषता है! दरअसल मुझे तो किसी भी डिश की जानकारी नहीं है इसलिए ऐसी बात की तो उम्मीद न कीजिए। असल में जब किसी भी विषय में बातचीत का समापन…
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222. ये लंदन-वो दिल्ली!
काफी दिन पहले अपने एक भारतीय अखबार में छपा एक कार्टून याद आ रहा है। उस समय लंदन को दुनिया का सबसे खूबसूरत नगर घोषित किया गया था। कार्टून में एक घर का कमरा दिखाया गया था, जिसमें एक भारतीय सरदार जी का परिवार था, सामान इधर-उधर फैला था, कमरे के आर-पार डोरी टांगकर…
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221. सात बहनें, लंदन की!
लंदन प्रवास के अंतिम वीकएंड में हमारा प्रोग्राम बना ईस्टबाउंड स्टेशन के आसपास बसे ब्रिटेन के समुद्रतट और वहाँ दूर-दूर तक फैले हरियाली से भरे पहाड़ी क्षेत्र में यात्रा करने का। इस क्षेत्र में ‘लैंसडाउन’ नाम का एक होटल भी दिखा, शायद इस नाम का इलाका भी वहाँ है, ऐसा ही एक क्षेत्र अंग्रेजों…
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220. लंदन में इधर-उधर!
लंदन प्रवास अब खत्म होने को है। जो लोग लंदन की ज्योग्राफी समझते हों, उनके लिए बता दूं, कि मेरे बेटे का घर यहाँ पर ब्लू ब्रिज के पास, थेम्स नदी के किनारे है। यह स्थान ‘कोल्ड हार्बर’ है। जैसे यहाँ ‘व्हार्फ’ बहुत हैं, वैसे ही हार्बर भी बहुत हैं। हमको तो नदी किनारे घर…
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92. फिर से मेरा ख्वाब-ए-जवानी थोड़ा सा दोहराए तो!
आज फिर से आसान वाला रास्ता चुन रहा हूँ, जी हाँ प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- अतीत में रहना अक्सर लोगों को अच्छा लगता है, मेरी उम्र के लोगों को और भी ज्यादा। कुछ लोग तो जब मौका मिलता है अतीत में जाकर दुबक जाते हैं, या ऐसा कहते रहते हैं, हमारे समय…