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आसमान धुनिए के छप्पर सा
आज अपनी ब्लॉगिंग यात्रा की सबसे पहली पोस्ट दुबारा शेयर कर रहा हूँ जो लगभग 8 वर्ष पहले लिखी थी। किसी गुमनाम से एक शहर में पैदा हुए थे हम नहीं है याद पर कोई अशुभ सा ही महीना था,रजाई की जगह ओढ़ी पुआलों की भभक हमनेविरासत में मिला हमको, हमारा ही पसीना था।यह पंक्तियां…