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बिखरा हुआ हूँ वक़्त!
बिखरा हुआ हूँ वक़्त के शाने पे गर्द सा,इक ज़ुल्फ़-ए-पुर-शिकन हूँ सँवारे मुझे कोई| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
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मिलता है क्यूँ नदी के!
अब तक तो ख़ुद-कुशी का इरादा नहीं किया,मिलता है क्यूँ नदी के किनारे मुझे कोई| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
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ज़िंदगी और बता तेरा इरादा क्या है!
आज मैं अपने यूट्यूब चैनल से अपने स्वर में एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी ने लिखा था और मेरे प्रिय गायक मुकेश जी ने गाया था। मुकेश जी द्वारा गाया रामावतार त्यागी जी का लिखे गीत मेरे स्वर में -ज़िंदगी और बता तेरा इरादा क्या है!https://youtu.be/G 4LeDjZXzC8 आशा है…
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कविता से बाहर!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि और मेरे अग्रज कुबेर दत्त जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। कुबेर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है कुबेर दत्त जी की यह कविता – कभी-कभी सोचता हूँबहुत हो गईबहुत हो गई कविताई । जीवन के नाम पर शेषचेक एक…
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काँटों में रख के फूल!
काँटों में रख के फूल हवा में उड़ा के ख़ाक, करता है सौ तरह से इशारे मुझे कोई| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
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पागल हूँ चाहता हूँ!
गो जानता हूँ सब ही निशाने पे हैं यहाँ,पागल हूँ चाहता हूँ न मारे मुझे कोई| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
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देखती ही रहो आज दर्पण न तुम!
आज मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से नीरज जी का लिखा और मुकेश जी का गाया यह बेहद खूबसूरत गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- देखती ही रहो आज दर्पण न तुम!https://youtu.be/aB3QOQ7_2m4 आशा है आपको पसंद आएगा,धन्यवाद
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तन्हाई डस रही है!
दरिया-ए-शब के पार उतारे मुझे कोई,तन्हाई डस रही है पुकारे मुझे कोई| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
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काँटे बोने वाले!
काँटे बोने वाले सच-मुच तू भी कितना भोला है,जैसे राही रुक जाएँगे तेरे काँटे बोने से| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी
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मिट सकते हैं धोने से|!
बाद-अज़-वक़्त पशीमाँ हो कर ज़ख़्म नहीं भर सकते तुम,दामन के धब्बे अलबत्ता मिट सकते हैं धोने से| मुज़फ़्फ़र हनफ़ी