Category: Uncategorized
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8. कालेज के दिन
(पुराने ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में आज प्रस्तुत है कालेज जीवन के कुछ अनुभव, यह आलेख थोड़ा लंबा और गहन है! ) बाबूराम स्कूल में 6 साल रहा और अच्छा खासा जुड़ाव रहा स्कूल से, इसलिए स्कूल के बारे में, वहाँ के शिक्षकों के बारे में भी मैंने कुछ बात की। यहाँ स्पष्ट कह…
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अमर रहे गणतंत्र हमारा
आज हमारे महान गणतंत्र की वर्षगांठ के अवसर मैं अपने सभी देशवासियों को परम श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की इन गीत पंक्तियों के साथ शुभकामनाएं देता हूँ तेरा गौरव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें। पुनः अनंत शुभकामनाएं।
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7. बाबूराम स्कूल
(पुराने ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में भी मैं अनुक्रम का पालन नहीं कर पा रहा हूँ, आज प्रस्तुत है स्कूल के कुछ अनुभव!) अब स्कूल के बारे में बात कर लें। कक्षा 1 से 5 तक गौशाला वाले सनातन धर्म स्कूल के बारे में तो बताने को कुछ नहीं है। बाबूराम स्कूल के बारे…
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10. रोज़गार दफ्तर की फाइलें भरें
शुरु के ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में प्रस्तुत है ये मेरा दसवां ब्लॉग। मैं 4-5 दिन तक बाहर रहा, मेरे छोटे बेटे के विवाह के सिलसिले में, सोचा था वहाँ पर रहते हुए भी, पुराने ब्लॉग्स तो दोहरा ही सकता हूँ, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया, इस बीच में कोई ब्लॉग पढ़ भी…
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9. झूमती चली हवा
अपने शुरु के ब्लॉग्स में से एक और आज दोहरा रहा हूँ, वैसे यह नौवां ब्लॉग था, और शायद शाहदरा में मेरी प्रवास अवधि के संबंध में अंतिम पड़ाव जैसा था। लगातार सीधी राह पर चलते जाने से भी काफी थकान हो जाती है, अतः थोड़ा इधर-उधर टहल लेते हैं। मैं यह भी बता दूं…
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4. इब्तदा कुछ इस तरह
अपने शुरु के ब्लॉग्स में से एक को आज दोहरा रहा हूँ, वैसे यह चौथा ब्लॉग था, लेकिन इससे मैंने क्रमशः अपनी कहानी सुनाना शुरू किया था। किसी ने फिर न सुना, दर्द के फसाने को मेरे न होने से राहत हुई ज़माने को। खैर दर्द का फसाना सुनाने का मेरा कोई इरादा नहीं है।…
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149. अंतराल- दोहराव
एक वर्ष से कुछ कम समय हुआ है, जब अचानक ब्लॉग लिखने की सनक सवार हुई थी। मैंने शुरुआत की थी, अपने जीवन के प्रारंभ से, कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं, व्यक्तियों आदि का, उनके माध्यम से मेरे जीवन पर पड़े प्रभाव आदि का ज़िक्र करते हुए। शायद 50-60 ब्लॉग, मैंने अपने जीवन के घटनाक्रम को फॉलो…
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148. कच्ची दीवार हूँ, ठोकर न लगाना मुझको
इंसान परिस्थितियों के अनुसार क्या-क्या नहीं बनता और अपने आपको किस-किस रूप में महसूस नहीं करता। कभी-कभी जीवन में ऐसा भी लगता है कि अब बहुत सहन कर लिया, एक झटका और लगा तो टूटकर बिखर जाएंगे। अरेे कुछ नहीं ज़नाब, बस असरार अंसारी जी की एक गज़ल याद आ रही थी, जिसको गुलाम अली…
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147. खुशबू जैसे लोग
अभी कल ही अपने एक पुराने कवि-मित्र का ज़िक्र किया था, मुद्दत हो गई उनसे मिले लेकिन आज भी याद आती है। हाँ कुछ लोग ऐसे भी होते हैं लोग जो लंबे समय बाद भी यादों में खटकते रहते हैं, हालांकि उनको भुला देना ही बेहतर होता है, मैं यह कहना चाहूंगा कि मेरे जीवन…
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146. इस सूने उदास मौसम में, कुछ तो यार करें
आज फिर पुराने दिनों में झांकने का मन हो रहा है, एक मित्र की याद आ रही है। बात है 1980 से 1983 के बीच की, जब मैं आकाशवाणी, जयपुर में अनुवादक के पद पर कार्यरत था और वहाँ बने कवि मित्रों में से एक थे- श्री कृष्ण कल्पित, वे उस समय जयपुर विश्वविद्यालय से…