Category: Uncategorized
-
15. नक्काशी करते हैं नंगे जज़्बातों पर
लीजिए पुरानी कहानी को और आगे बढ़ाते हैं, प्रस्तुत है अगला पन्ना। दिल्ली में उन दिनों तीन-चार ही ठिकाने होते थे मेरे, जिनमें से बेशक उद्योग भवन स्थित मेरा दफ्तर एक है, उसके अलावा शाम के समय दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी या फिर कनॉट प्लेस, जहाँ अनेक साहित्यिक मित्रों से मुलाक़ात होती थी। इसके अलावा जब…
-
14. इस अंधेरी कोठरी में एक रोशनदान है!
लीजिए पुरानी कहानी का एक पन्ना और खोल रहा हूँ। जीवन में कोई कालखंड ऐसा होता है, कि उसमें से किस घटना को पहले संजो लें, समझ में नहीं आता है। अब उस समय को याद कर लेते हैं जब सार्वजनिक जीवन में भ्रष्टाचार और नाइंसाफी के विरुद्ध जयप्रकाश नारायण जी ने ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन…
-
13. मंज़िल न दे, चराग न दे, हौसला तो दे
पुरानी कहानी के पन्ने इतने रोचक हैं, कि उनको दोहराते चले जाने का मन करता है। लीजिए एक पन्ना और खोल रहा हूँ। एक नाइंसाफी तो लंबे समय से चलती चली आई है कि इतिहास को राजाओं के शासन काल से बांट दिया गया, बल्कि इतिहास का मतलब सिर्फ इतना हो गया कि किस राजा…
-
12. सफर दरवेश है ऐ ज़िंदगी….
जीवन गाथा के शुरुआती पन्नों में से आज एक पन्ना और दोहरा रहा हूँ। दिल्ली में रहते हुए मैंने पीताम्बर बुक डिपो और दिल्ली प्रेस में दो प्राइवेट नौकरी की थीं और उसके बाद 6 वर्ष तक उद्योग मंत्रालय में कार्य किया, जिसमें से मैं 3 वर्ष तक संसदीय राजभाषा समिति में डेपुटेशन पर भी…
-
152. ओरांगउटांग
आज मुक्तिबोध जी की एक श्रेष्ठ रचना याद आ रही है, जिसमें विचारधाराओं के युद्ध को लेकर बड़ा सुंदर वर्णन किया गया है, वह कविता या साहित्य के क्षेत्र में हो, राजनीति में हो या किसी अन्य क्षेत्र में हो। कई बार बाद में ऐसा लगता है कि विचारधारा कहीं पीछे रह गई है और…
-
मोहल्ला मेरा
आज, मेरे शुरू के ब्लॉग पोस्ट्स में से एक पोस्ट और, जिसमें मैंने उस मोहल्ले की थोड़ी झलक दिखाई है, जिसमें मेरा बचपन बीता था। अब थोड़ा समय उस मोहल्ले को भी दे दें, जो लगभग 25 वर्ष तक मेरा ठिकाना था। जैसा मैंने अपने पिछले ब्लॉग में लिखा था, दरियागंज छोड़कर हम भोलानाथ नगर,…
-
151. नाज़ था जिस पे, मेरे सीने में वो दिल ही नहीं!
आज मुकेश जी का गाया एक बहुत प्यारा गीत याद आ रहा है। यह गीत लिखा है- जावेद अनवर जी और असद भोपाली जी ने, संगीतकार हैं- उषा खन्ना जी और गायक हैं मेरे प्रिय मुकेश जी। ऐसे गीत कुछ मौकों पर बहुत सहारा देते हैं, कुछ अंदर की भाप निकालने के लिए, जब…
-
3. चल अकेला
आज फिर बेधड़क, अपना शुरू का एक ब्लॉग शेयर कर रहा हूँ। हज़ारों मील लंबे रास्ते तुझको बुलाते, यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते है कौन सा वो इंसान यहाँ पर जिसने दुख ना झेला। चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला । मुकेश जी के गाये इस गीत ने जीवन में बहुत बार हिम्मत…
-
150. तूने जिस फूल को पाला वो पराया होगा।
कुछ दिन से नई पोस्ट नहीं लिख रहा था, बेटे की शादी थी, सोचा कि इस बीच पुरानी पोस्ट ही शेयर कर लेता हूँ, जो जीवन के विभिन्न पड़ावों से जुड़ी हैं और मेरे दिल के बहुत क़रीब हैं। आगे भी इनको शेयर करूंगा, फिलहाल मेरा 150 वां ब्लॉग पोस्ट, जो कुछ दिन से स्थगित…
-
11. हम शंटिंग ट्रेन हो गए
(पुराने ब्लॉग्स को दोहराने के क्रम में आज दिल्ली में प्रारंभिक नौकरी, दैनिक रेल-यात्रा आदि के कुछ अनुभव! ) पीताम्बर बुक डिपो में कुल मिलाकर मैं एक साल तक रहा, उसके बाद मैंने फैसला कर लिया कि अब यहाँ अधिक समय तक नहीं रहूंगा। अब तक इतना आत्मविश्वास आ गया था कि मैं इससे बेहतर काम…