Category: Uncategorized
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157. या रब न वो समझे हैं, न समझेंगे मेरी बात!
सामान्यतः मैं अपने ब्लॉग्स में गीतों, गज़लों के माध्यम से अपनी बात कहने की कोशिश करता हूँ। कई बार मन होता है कि किसी सामयिक विषय पर अलग से अपनी बात कहूं। ऐसा मैं कभी-कभी करता भी हूँ, जब ऐसी घटना हो जो सामाजिक विसंगति अथवा उपलब्धि से जुड़ी हो लेकिन जिसे किसी राजनैतिक गतिविधि…
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20. आंचल ही न समाए तो क्या कीजे!
आज फिर से जीवन का एक पुराना पृष्ठ, कुछ पुरानी यादें, एक पुराना ब्लॉग! जयपुर पहुंच गए लेकिन काफी कुछ पीछे छूट गया। मेरी मां, जिनके लिए हमारा वह पुराना मोहल्ला अपने गांव जैसा था, बल्कि मायका भी था क्योंकि उनके भतीजे- वकील साहब वहीं रहते थे। वो दिल्ली नहीं छोड़ पाईं। एक-दो बार हमारे…
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156. यहाँ सुबह से खेला करती है शाम!
पुराने ब्लॉग्स तो फिर से पढ़ते ही रहेंगे, आज किशोर दा को उनके एक गीत के बहाने याद कर लेते हैं। किशोर कुमार जी शायद भारतीय फिल्म संगीत में सबसे लोकप्रिय पुरूष गायक रहे हैं। एक समय ऐसा भी आया कि जब किशोर कुमार जी की बढ़ती डिमांड के कारण, सुरों के बादशाह माने जाने…
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155. जो तार से निकली है, वो धुन सबने सुनी है!
मैं अक्सर मुकेश जी के गाए गीत दोहराता हूँ, क्योंकि वे मेरे परम प्रिय गायक हैं, मैं दिल से उनके साथ जुड़ा हूँ, लेकिन यह सच्चाई है कि हमारे देश में एक से एक महान गायक हुए हैं और उनमें से अनेक फिल्म जगत से जुड़े रहे हैं। आज मुझे तलत महमूद जी का गाया…
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19. हम खें जुगनिया बनाय गए, अपुन जोगी हो गए राजा
प्रस्तुत है एक और ब्लॉग, जो मेरे लिए अविस्मरणीय है। दिल्ली में सरकारी सेवा के दौरान ही मैंने स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की एक और परीक्षा दी, जो हिंदी अनुवादक के पद पर चयन के लिए थी। इस परीक्षा में मैं सफल हुआ और उसके आधार पर ही आकाशवाणी, जयपुर में अनुवादक पद के लिए मेरा…
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18. भूख मिट नहीं सकती, पेट भर नहीं सकता ज़िंदगी के हाथों में, कौन सा निवाला है!
चलिए पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं। दिल्ली से जाल समेटने से पहले, कुछ और बातें कर लें। वैसे तो रोज़गार की मज़बूरियां हैं वरना कौन दिल्ली की गलियां छोड़कर जाता है। वैसे भी यह तो अतीत की बात है, मैं इसे कैसे बदल सकता हूँ? अगर बदल सकता तो कुछ…
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154. रोशनी हो न सकी, दिल भी जलाया मैंने!
आज मुकेश जी का गाया एक गीत याद आ रहा है, यह गीत उन्होंने फिल्म- ‘दिल भी तेरा, हम भी तेरे’ में धर्मेंद्र जी के लिए गाया है, संगीतकार हैं- कल्याणजी आनंदजी, जो उन संगीतकारों में से एक हैं, जिन्होंने मुकेश जी की अनूठी आवाज़ का भरपूर इस्तेमाल किया है। इसके गीतकार हैं- शमीम जयपुरी।…
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17. लेखनी मिली थी गीतव्रता, प्रार्थना पत्र लिखते बीती!
फिलहाल वही काम कर रहा हूँ, जो सबसे आसान है, अपने पुराने ब्लॉग दोहराना, लीजिए प्रस्तुत है एक और ब्लॉग। ऐसा लगता है कि कवियों, साहित्यकारों की बात अगर करते रहेंगे तो दिल्ली छोड़कर आगे ही नहीं बढ़ पाएंगे। लेकिन कुछ लोगों की बात तो करनी ही होगी। आज पहले एक गोष्ठी की बात कर…
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16. घर, शहर, दीवार, सन्नाटा- सबने हमें बांटा
लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग। जिस प्रकार लगभग सभी के जीवन में भौतिक और आत्मिक स्तर पर घटनाएं होती हैं, जिनको शेयर करना समीचीन होता है। मैं प्रयास करूंगा कि जहाँ तक मेरी क्षमता है, मैं रुचिकर ढंग से इन घटनाओं को आपके सपने रखूं। इस क्रम में अनेक नगर, व्यक्ति और उल्लेखनीय…
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153. धूप, धुआं, पानी में
आज एक नवगीत याद आ रहा है, नीलम सिंह जी का लिखा हुआ, यह गीत जिस समय मैंने पढ़ा था, बहुत अच्छा लगा था और आज तक याद है। इस गीत में जो मुख्यतः अभिव्यक्त किया गया है, वह यही है कि जीवन में जो कुछ झेलना पड़ता है, उसके बारे में सोचते रहें, मन…