Category: Uncategorized
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वनवास का क्षेत्र- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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67. इसलिए प्यार को धर्म बना!
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- (यह पोस्ट मैंने बाबा राम रहीम को सज़ा होने के समय लिखी थी) एक बाबा को सज़ा का ऐलान होने वाला है। अच्छा नहीं लगता कि बाबाओं को इस हालत से गुज़रना पड़े। हमारे देश में परंपरा रही है, राजा-महाराजाओं…
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यह तो कहो किसके हुए!
आज फिर से एक बार, मेरे प्रिय मंचीय कवियों में से एक स्व. भारत भूषण जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ। उनका यह गीत भी मुझे विशेष रूप से प्रिय है, इस गीत में कवियों और विशेष रूप से मंचीय कवियों की व्यथा की अभिव्यक्ति की गई है और यह पूछा गया कि…
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मेरी कब्र के पास खड़े मत रहो, आंसू न बहाओ!
आज मैं विख्यात अमेरिकी कवियित्री मैरी एलिज़बेथ फ्राये की एक प्रसिद्ध कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य संकलन- ‘PoemHunter.com’ से लेता हूँ। लीजिए…
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सकल सुमंगल दायक, रघुनायक गुणगान।
लीजिए अब हम गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करने के सिलसिले के समापन की ओर बढ़ रहे हैं। जैसा मैंने पहले भी कहा है, मेरी यह प्रस्तुति मुकेश जी द्वारा गये गए अंश में से जितना मुझे याद है, उस पर आधारित है। कल के प्रसंग में…
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तासु दूत मैं जा करि, हरि आनेहु प्रिय नारि।
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करने का सिलसिला शायद दो दिन और चलेगा। मैं मुकेश जी द्वारा गये गए अंश में से ही जितना मुझे याद आ रहा है वह मैं यहाँ दे रहा हूँ। कल के प्रसंग में सीता माता को श्रीराम जी की निशानी देकर,…
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चकित चितव मुदरी पहिचानी!
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करने के क्रम में कल हनुमान जी ने लंकिनी से निपटने के बाद उसकी शुभकामनाएं प्राप्त कर ली थीं और इसके बाद उनके लंका में प्रवेश और सीता-माता की खोज और उनके पास तक पहुंचने का प्रसंग आज होगा। प्रारंभ…
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प्रविसि नगर कीजे सब काजा, हृदय राखि कौशलपुर राजा।
गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित महाकाव्य श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड से कुछ अंश प्रस्तुत करना मैंने शुरू किया जो कम से कम दो-तीन दिन और चलेगा। मैं मुकेश जी द्वारा गये गए भाग में से ही कुछ अंश यहाँ दे रहा हूँ, जो मुझे याद आ रहे हैं। मुझे आशा है कि इस अमर काव्य के…
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राम काज सब करिहऊ, तुम बल-बुद्धि निधान!
अभी दो तीन दिन पहले ही राजनैतिक परिप्रेक्ष्य का संदर्भ देते हुए श्रीरामचरितमानस के सुंदर कांड से कुछ भाग उद्धृत किया था, जिसमें महाबली रावण के अहंकार और विनाशोन्मुख होने को दर्शाया गया था, जब उसको किसी की सलाह अच्छी नहीं लगती। फिर मुझे खयाल आया कि गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस,…
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There was a time, when I used Ink Pen!
Yes there was a time, when in India we used coins called Athanni (half rupee), Chavanni (quarter rupee) or say four Aannas, 2 Paisa coin and round one paisa coin of brass with a round hole also in the middle. That was another period. There were chaupals, especially in villages where people gathered and talked…