Category: Uncategorized
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Our world and the evil forces!
Long back I had given an example from famous science fiction by H.G.Wells – The Island of Dr. Moreau, in an essay written by me for some competitive exam. In that novel the writer had woven a story according to which a famous Doctor Moreau keeps several animals in a far away Island, he treats…
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मेरा नाम क्या है जी!
आज बाकी बातें छोड़कर, देश के एक प्रमुख बैंक के साथ हुए अनुभव के बारे में बात कर लेते हैं। आईसीआईसीआई देश का एक प्रमुख प्राइवेट बैंक है और मेरे मन में अक्सर इनकी सेवाओं को लेकर संतुष्टि का भाव रहा है। लेकिन एक नया अनुभव हुआ मुझे, जब मेरा डेबिट कार्ड कुछ कारणों…
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तू भी हुआ रखैल — बदरा पानी दे !
जब स्व. रमेश रंजक जी के दो गीत पहले शेयर किए तो खयाल आया कि गरीब किसान की हालत को लेकर बादल से फरियाद वाला उनका गीत भी शेयर करूं। गरीब किसान का पूरा भविष्य, उसकी खेती पर और उसकी खेती वर्षा पर निर्भर होती है। इस गीत में उन्होंने बादलों को यह भी उलाहना…
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तीस दिन में एक मुट्ठी दाम याद आए!
पिछली बार मैंने स्व. रमेश रंजक जी का एक प्रेम गीत, शेयर किया था, आज उनका एक गीत जो जुझारूपन का, आम आदमी की बेचारगी का, बड़ी सरल भाषा में सजीव चित्रण करता है, कैसे एक आम इंसान के दिन और महीने बीतते हैं, उसका वर्णन इस गीत में है, लीजिए प्रस्तुत है ये गीत-…
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भर-भर आई आँख , ब्याज से पाँच-पचास हुए!
आज मैं अपने प्रिय कवियों में से एक, स्व. रमेश रंजक जी का एक प्यारा सा गीत, बिना किसी भूमिका के शेयर करूंगा। जितने दूर हुए तुम हमसे उतने पास हुए, दर्द गीत बन गया जिस घड़ी प्राण उदास हुए। याद किसी ज़िद्दी बालक-सी पकड़ एक उँगली, उगी जिस तरह प्रीत उसी आँगन…
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The Fittest Survive!
There was a time when our forefathers lived in jungles, as we are told. In jungles there is the law of the land, which tells that the powerful species survive. We hear about species which existed in the world earlier and do not exist now. Surprisingly some species of earlier time we hear about were…
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दिल्ली चुनाव- मुफ्त में भाजी, मुफ्त में खाजा!
आज अपनी दिल्ली को याद करने का मन हो रहा, जहाँ मेरा बचपन बीता और जहाँ मैंने शुरू की कुछ नौकरियां की थीं। मेरा जन्म वहाँ 1950 में हुआ था, जब आज़ादी के बाद दिल्ली बस रही थी, चारदीवारी वाली पुरानी दिल्ली के पार दूर-दूर तक। उस समय की एक गतिविधि जो चुनाव के समय…
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Sunshine Blogger Award!
Dear fellow bloggers and friends. I am very happy to inform you all that once again I have been nominated, among other bloggers, by the same blogger friend. I am very much thankful to him. This time it is “Sunshine Blogger Award” and once again I have been nominated by my creative blogger…
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Justice for all!
Today again discussing on an IndiSpire prompt. Question is whether law is lenient towards the rich and powerful. We have seen examples in society and as reflected in fiction, films etc. When somebody goes for a pilgrimage, taking trouble of walking a lot or travelling a lot, and then submit his or her…
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नाविक – रवींद्र नाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…