Category: Uncategorized
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समझा दे कोई जा कर
रिंदों को ‘हफ़ीज़’ इतना समझा दे कोई जा कर,आपस में लड़ोगे तुम वाइ’ज़ का भला होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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ऐसा है स्वभाव प्रेम का- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट|आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत…
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दीवाने से दीवाना!
फ़र्ज़ानों का क्या कहना हर बात पे लड़ते हैं,दीवाने से दीवाना शायद ही लड़ा होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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कतरा के तो जाते हो!
कतरा के तो जाते हो दीवाने के रस्ते से,दीवाना लिपट जाए क़दमों से तो क्या होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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चुप रहिए तो बर्बादी!
क्या तेरा मुदावा हो दर्द-ए-शब-ए-तन्हाई,चुप रहिए तो बर्बादी कहिए तो गिला होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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गुमराह-ए-मोहब्बत!
गुमराह-ए-मोहब्बत हूँ पूछो न मिरी मंज़िल,हर नक़्श-ए-क़दम मेरा मंज़िल का पता होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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शायद इसी मरने में!
कुछ सोच के परवाना महफ़िल में जला होगा,शायद इसी मरने में जीने का मज़ा होगा| हफ़ीज़ बनारसी
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आइना हूँ मैं तेरा!
आज एक बार मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मुकेश जी का गाया एक प्रसिद्ध गीत अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- हुस्न ए जानां इधर आ, आइना हूँ मैं तेरा आशा है आपको ये गीत पसंद आएगा। धन्यवाद
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मंज़िल का पता!
हाँ मगर तस्दीक़ में उम्रें गुज़र जाती हैं ‘नूर’,कुछ न कुछ रहता है सब को अपनी मंज़िल का पता| कृष्ण बिहारी नूर