Category: Uncategorized
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Remembering My Teachers
Next week we would be observing ‘Teachers day’ in India on the occasion of birthday of our Ex President and great scholar Late Sarvapalli Radhakrishnan JI. On this occasion I am also remembering some incidents connected with my teachers. These incidents I have also mentioned in my earlier blog posts, when I covered the major…
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मैं बेचैन हूँ- रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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ये जो मन की सीमा-रेखा है!
पिछले लगभग एक माह की अवधि में ही मेरे प्रिय गायक स्वर्गीय मुकेश चंद माथुर जी का जन्म दिन (22 जुलाई) और पुण्य तिथि 27 अगस्त दोनो ही आए| 27 अगस्त,1976 को ही इस महान सुरीले गायक और फिल्मी दुनिया में इंसानियत की एक महान मिसाल, मुकेश जी का डेट्रायट, अमरीका में दर्शकों के समक्ष…
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जो अपने खून को पानी बना नहीं सकते!
आज साहिर लुधियानवी साहब की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| साहिर जी फिल्मी दुनिया के एक ऐसे गीतकार थे जिनका नाम अदब की दुनिया में भी बड़ी इज्जत के साथ लिया जाता था| वे मुशायरों की शान हुआ कराते थे और बड़े स्वाभिमानी भी थे, उन्होंने ही फिल्म और संगीत वालों के सामने यह…
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मृत्यु- रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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यही आग़ाज़ था मेरा, यही अंजाम होना था!
आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट की बारी है – आज गुलाम अली जी का गाया हुआ एक गीत याद आ रहा है, जिसे आनंद बक्षी जी ने लिखा है और इसका संगीत अनु मलिक जी ने तैयार किया है। यह गीत वैसे ही सुंदर लिखा गया है और गुलाम अली जी की गायकी…
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My travel destination after defeat of COVID-19
We have been facing the conditions of the spread of this dreaded Pandemic called COVD-19 in India for almost 5 months now. It is one of the important topics we often discuss, we sometimes feel somewhat satisfied that its impact has been lesser in India compared to so many countries, considering the population of our…
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यही होता है तो आखिर यही होता क्यों हैं!
कैफी आज़मी साहब की एक गजल आज याद आ रही है| कैफी साहब हिंदुस्तान के एक प्रसिद्ध शायर रहे हैं और बहुत सी सुंदर रचनाएँ उन्होंने हमें दी हैं, फिल्मों में भी उनकी बहुत सी रचनाओं का इस्तेमाल किया गया और आज जो गज़ल मैं शेयर कर रहा हूँ उसको जगजीत सिंह साहब ने गाया…
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तेरा मेला पीछे छूटा, राही चल अकेला!
फिल्म-संबंध, जो 1969 में रिलीज़ हुई थी, उसका एक गीत आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| यह गीत राष्ट्रीय भावनाओं से ओत-प्रोत कविताएं लिखते थे, जैसे ‘आओ बच्चे तुम्हें दिखाएँ झांकी हिंदुस्तान की’ आदि-आदि| आज के इस गीत के लिए संगीत दिया है ओ पी नैयर जी का और इसे गाया है मेरे प्रिय गायक- मुकेश…
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स्वरों के खिलाड़ी-बंदिश बैंडिट्स!
आज मैं एमेजॉन प्राइम वीडियोज़ पर इन दिनों प्रदर्शित की जा रही वेब सीरीज़- ‘बंदिश बेंडिट्स’ को देखने के अपने अनुभव शेयर कर रहा हूँ| मुझमें इतना आत्मविश्वास या कहें कि अहंकार नहीं है कि मैं एक समीक्षक के रूप में खुद को प्रस्तुत करूं और आपको बताऊँ कि इसको देखना चाहिए या नहीं| बस…