Category: Uncategorized
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Can I be my own Hero?
I remember the good old days, when the heroes, the leading characters in novels, stories and movies, fought all odds, the evil powers etc. and in the end came out winners, scratch free. People also expected some divine power to come as a hero and save them. They themselves, while awaiting for such wonders, can…
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पेट वक्ष से बड़ा, पेट से बड़ी कमर है!
आज मुझे यहाँ क्या शेयर करना है, यह तो पहले से ही घोषित है| हिन्दी काव्य मंचों के प्रसिद्ध हास्य कवि स्वर्गीय ओमप्रकाश आदित्य जी की एक कविता को मैंने कल शेयर करना प्रारंभ किया था| जी हाँ नेताजी के हास्य-व्यंग्यमय नख-शिख वर्णन में कुछ अंगों के बारे में कल बात कर ली थी, कुछ…
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आश्वासन का जर्दा, भाषण की सुपाड़ियाँ!
हिन्दी काव्य मंचों के प्रसिद्ध हास्य कवि स्वर्गीय ओमप्रकाश आदित्य जी एक अत्यंत सृजनशील रचनाकार थे, छंद पर उनका पूर्ण अधिकार था और उनकी हास्य कविताओं को बहुत आनंद और आदर के साथ सुना जाता था| मेरा सौभाग्य है कि अनेक बार कवि सम्मेलनों के आयोजन के कारण उनसे भेंट का अवसर मिला था| आज…
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तू खुशी से मेरी जल गया!
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट-आज एक पुराना गीत याद आ रहा है, जिसे मुझे मेरे एक पुराने मित्र और सहकर्मी- श्री चुन्नी लाल जी गाया करते थे। ये गीत बहुत पुरानी फिल्म- दिल-ए-नादां का है, जिसे शकील बदायुनी जी ने लिखा है और गुलाम…
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नीम का पौधा हूँ, आँगन में लगा लो मुझको
प्रसिद्ध शायर और फिल्मी गीतकार नक़्श लायलपुरी जी की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| फिल्मों में उन्होंने बहुत प्यारे गीत लिखे हैं, जैसे- ‘मैं तो हर मोड़ पर तुझको दूंगा सदा’, ‘ये मुलाक़ात इक बहाना है’, ‘उल्फ़त में ज़माने की हर रस्म को ठुकराओ’ आदि-आदि| लीजिए आज प्रस्तुत है नक़्श लायलपुरी जी की…
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मानहानि – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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बूंद बन-बन टूट जाऊँगा वहां
हिन्दी के गीत- कविता संसार के एक और अनमोल रत्न स्वर्गीय रमानाथ अवस्थी जी को आज याद कर रहा हूँ| पहले भी इनके कुछ गीत मैंने शेयर किए है| भावुकता का अजीब संसार होता है इन लोगों के पास, जिसमें ये जीते हैं और अपनी अनूठी अनुभूतियों से हमें परिचित कराते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…
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Justice the Princess!
We are living in the greatest democracy in the world, though we might be having some great minds who never find anything positive with our Country. Yes, there are some discrepancies associated with any system or arrangement. One big thing which all modern societies claim is that all are equal before law. Yes, very true,…
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ये बिल्ली जाने कब से मेरा रस्ता काट जाती है!
ज़नाब बेकल उत्साही जी भी किसी समय कवि-सम्मेलनों की शान हुआ कराते थे| आजकल तो लगता है कि उस तरह के कवि-सम्मेलन ही नहीं होते, वैसे भी मैं काफी समय पहले हिन्दी भाषी इलाका छोड़कर गोवा में आ गया हूँ, अब यहाँ कवि सम्मेलन की उम्मीद, वो भी इस कोरोना काल में! खैर पुराना समय…
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शाश्वतता की कगार – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…