Category: Uncategorized
-
तेरा नाम ही लेना छोड़ दिया!
आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| आज का ये शानदार गीत 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘सहेली’ से है, जिसे लिखा है – इंदीवर जी ने और कल्याणजी आनंद जी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी ने अपने लाजवाब अंदाज़ में गाया…
-
बोल बोल आरंबोल!
आज मैं गोवा की एक बेहद खूबसूरत बीच – ‘आरंबोल’ के बारे में बात करूंगा| पिछले कई वर्षों से गोवा के पंजिम नगर में रह रहा हूँ, और इसके बारे में भी हमेशा दुविधा में रहता हूँ कि इसे ‘पणजी’ कहूँ या ‘पंजिम’ कहूँ, क्योंकि ये दोनों नाम ही लिखे मिल जाते हैं| हाँ तो…
-
यूं उठे आह उस गली से हम!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- एक किस्सा याद आ रहा है, एक सज्जन थे, नशे के शौकीन थे, रात में सोते समय भी सिगरेट में नशा मिलाकर पीते थे, एक बार सुट्टे मारते-मारते सो गए, और बाद में अचानक उन्हें धुआं सा महसूस हुआ, कुछ देर तो सोचते रहे कि…
-
सागर किनारे – अज्ञेय
आज हिन्दी साहित्य के एक विराट व्यक्तित्व – सच्चिदानंद हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| अज्ञेय जी ने वैसे तो साहित्य की हर विधा में अपनी छाप छोड़ी है परंतु हिन्दी कविता को नया स्वरूप प्रदान करने वालों में उनकी प्रमुख भूमिका थी| लीजिए प्रस्तुत है अज्ञेय जी की एक…
-
मुझे पूर्णतः प्रसन्न रखिए – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। आज भी मैंने अनुवाद के लिए अंग्रेजी कविता को ऑनलाइन उपलब्ध कविताओं…
-
ये क्या किया रे दुनियावाले!
आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| ये शानदार गीत 1969 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘बेटी’ से है, जिसे लिखा है – शकील बदायुनी साहब ने और सोनिक ओमी जी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी ने अपने लाजवाब अंदाज़ में गाया है|…
-
चाँद रोया साथ मेरे, रात रोयी बार -बार!
काफी दिन से मैंने अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया कोई गीत शेयर नहीं किया है| लीजिए आज मैं ये शानदार गीत शेयर कर रहा हूँ| फिल्म- ‘एक रात’ के लिए यह गीत ‘अंजान’ जी ने लिखा है और उषा खन्ना जी के संगीत निर्देशन में इसे मुकेश जी ने अपने लाजवाब अंदाज़ में…
-
लोग यों ही हैं झिझकते सोचते!
कल मैंने खड़ी बोली हिन्दी के एक प्रारंभिक प्रमुख कवि स्वर्गीय अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ जी की एक रचना प्रस्तुत की थी। आज फिर से स्वर्गीय ‘हरिऔध’ जी की एक और रचना शेयर कर रहा हूँ, जिसे मैंने अपने स्कूल के पाठ्यक्रम में भी पढ़ा था| कविता के क्या दायित्व हैं और कवियों से हम…
-
किस तरह कुल की बड़ाई काम दे!
आज मैं एक ऐसे कवि की रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिनको खड़ी बोली का प्रारंभिक महाकाव्य रचयिता माना जाता है| आज के रचनाकार हैं, स्वर्गीय अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ जी, जिन्होंने, खड़ी बोली में कविता के प्रारंभिक काल में अपना अमूल्य योगदान किया था| हरिऔध जी का जन्म 1865 मेँ हुआ था और भारत…