Category: Uncategorized
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आखिर टूट जाता है!
आज फिर से दिन है पुरानी पोस्ट का, लीजिए प्रस्तुत है एक पुरानी पोस्ट- आज फिर दिल की बात होनी है, वैसे तो मैं समझता हूँ कि हर दिन इसी विषय पर बात की जा सकती है। एक गीत का मुखड़ा याद आ रहा है, ‘फिर वही दिल लाया हूँ’, जिस अंदाज़ में इसे रफी…
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मेरा बदन हो गया पत्थर का!
स्वर्गीय रमेश रंजक जी मेरे प्रिय कवि रहे हैं, उनका स्नेह भी मिला मुझे और एक विशेषता थी उनमें कि यदि अच्छी रचना उनके शत्रु की भी हो तो उसकी तारीफ़ अवश्य करते थे| कम शब्दों में कैसे बड़ी बात कही जाए, यह उनकी रचनाओं में देखा जा सकता है| आज मैं रंजक जी का…
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कच्चे रंगों से तसवीर बना डाली!
स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी के हिन्दी कविता के एक प्रमुख हस्ताक्षर रहे हैं| वे बच्चों की पत्रिका पराग के संपादक भी रहे थे और अपने साहित्य सृजन के लिए अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किए गए| आज मैं नंदन जी की यह रचना शेयर कर रहा हूँ- रेशमी कंगूरों परनर्म धूप सोयी।मौसम नेनस-नस मेंनागफनी बोयी!दोषों के…
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मौत मुसाफ़िरखाना है!
एक विषय दिया गया है, #IndiSpire के मंच पर, The end is often the beginning #Life वहाँ पर प्रविष्टि सामान्यतः अंग्रेजी में दी जाती है, परंतु मुझे लगा कि इस विषय पर लिखते हुए भारतीय दर्शन की जो बातें मेरे मन में आ सकती हैं, वे सभी हिन्दी में हैं और मैं हिन्दी और अंग्रेजी…
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चोट खाते रहे गुनगुनाते रहे!
स्वर्गीय डॉ राही मासूम रज़ा साहब हिन्दी-उर्दू साहित्य के एक प्रमुख रचनाकार रहे हैं| वे कविता, शायरी और उपन्यास लेखन, सभी क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय थे और पाठकों, श्रोताओं के चहेते रहे हैं| उनको अनेक साहित्यिक और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए थे| आज मैं डॉ राही मासूम रज़ा साहब की यह प्रसिद्ध गजल…
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मिट्टी को बादल में गूँथें, चाक चलाएँ!
स्वर्गीय निदा फ़ाजली साहब मेरे प्रिय शायर रहे हैं, उनकी अनेक रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज एक रचना उनकी शेयर कर रहा हूँ, जो बताती है कि जाति-धर्म के भेदभाव कितने बेमानी हैं| इस कविता में वह कहते हैं कि बच्चे बनकर आइए वही काम करें जो ऊपर वाला करता है, विभिन्न…
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पंजिम, मांडवी नदी और मीरामार!
आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ| पिछले दिनों मैंने देश-विदेश के कुछ स्थानों के भ्रमण पर आधारित ब्लॉग लिखे, जिनका प्रारंभ मैंने लंदन से किया था और इस बात को भी रेखांकित किया था कि लंदन के जीवन में थेम्स नदी…
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चाँद निकला तो सो गईं आँखें!
नक़्श लायलपुरी साहब एक प्रमुख साहित्यकार और फिल्मी गीतकार रहे हैं, उनके अनेक गीत हम आज भी गुनगुनाते हैं, जैसे ‘मैं तो हर मोड़ पर तुझको दूंगा सदा’, ‘कई सदियों से कई जन्मों से’ आदि-आदि| आज उनकी एक सुंदर सी ग़ज़ल मैं शेयर कर रहा हूँ, जिसमें विभिन्न परिस्थितियों और मनः स्थितियों में आँखों की…
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यह कवि का घर है !
डॉ रामदरश मिश्र जी, जिनकी रचना मैं आज शेयर कर रहा हूँ, वे हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं और कविता, कहानी तथा उपन्यास लेखन, सभी क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय एवं सम्मानित हैं| आज की उनकी इस रचना में भी उन्होंने कवि की अलग प्रकार की दृष्टि और दर्शन का परिचय दिया है- गेंदे…
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बस यही एक अच्छी बात है!
आज एक ऐसे रचनाकार की रचना शेयर कर रहा हूँ, जिनकी कोई रचना शायद मैंने पहले शेयर नहीं की है| श्री राजेन्द्र राजन एक श्रेष्ठ रचनाकार हैं जिन्होंने अनेक श्रेष्ठ कविताएं, गीत और कहानियाँ लिखी हैं| आज मैं उनकी एक सुंदर रचना शेयर कर रहा हूँ- मेरे मन मेंनफ़रत और गुस्से की आग,कुंठाओं के किस्से,और…