Category: Uncategorized
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भारत माता ग्रामवासिनी!
छायावाद युग के एक स्तंभ, स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| इस कविता को देखकर यह भी आभास होता है कि अब तक कविता कितनी बदल गया है| इस कविता में पंत जी ने उस समय की भारत माता की दयनीय स्थिति का मार्मिक चित्रण किया है| लीजिए प्रस्तुत…
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विषबुझे खंजर न फेंक!
आज एक बार फिर से मैं अपने अग्रज और मेरे लिए गुरुतुल्य रहे श्रेष्ठ नवगीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की यह ग़ज़ल – दो दिलों के दरमियाँ दीवार-सा अंतर न फेंक,चहचहाती बुलबुलों पर विषबुझे खंजर न…
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जैसे जैसे घर नियराया!
आज मैं श्रेष्ठ नवगीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का एक छोटा सा और खूबसूरत नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| किस प्रकार हम अनेक प्रकार से अपने घर से जुड़े होते हैं| पुराने ग्रामीण परिवेश को याद करके इस गीत का और भी अच्छा आस्वादन किया जा सकता है| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय…
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मटरू का आना और जाना!
मटरू का पता ही नहीं चलता कि कब वो हमारे, मतलब अपने घर में रहेगा और कब बाहर चला जाएगा| एक तरह से देखा जाए तो उसको आवारा कहा जा सकता है, कभी वो रात में अपने स्थान पर सोता है और सुबह होते ही चला जाता है, और कभी रात भर गायब रहता है…
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Writing and Re-writing of History!
It’s true that image creation for self is what the rulers like the most. For this they have been using the writers and historians also. Till now the job of image creation, writing in favour of those in power was in the hands of some communist authors, historians etc. who did, whatever suited to those…
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रंगीन खिलौने – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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हम हैं अनाड़ी!
आज 1959 में रिलीज हुई फिल्म -अनाड़ी, का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे शैलेन्द्र जी ने लिखा है और शंकर जयकिशन जी ने इसका संगीत दिया है| इस गीत के लिए गीत लेखन, संगीत और गायन तीनों श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ होने के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किए गए थे| राजकपूर साहब पर फिल्माए…
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दूसरा बनवास !
कैफ़ी आज़मी साहब हमारे देश के ऐसे मशहूर शायरों में शामिल थे, जिनका नाम शायरी की दुनिया में बहुत आदर के साथ लिया जाता है| आज उनकी जो नज़्म मैं शेयर कर रहा हूँ उसमें उन्होंने बताया है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी यदि बाबरी मस्जिद का गिराया जाना देखते तो उनको कैसा महसूस होता|…
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आँख बच्ची की पनीली है!
आज अदम गोंडवी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| ठेठ देहाती अंदाज़ में आम जनता के जीवन की सच्चाइयों को अदम गोंडवी जी ने बड़े सलीके के साथ बेबाक़ी के साथ अभिव्यक्त किया है| लीजिए आज अदम गोंडवी जी की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली…