Category: Uncategorized
-
मैंने उनके भी गिरेबान फटे देखे हैं!
स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी का एक गीत मैं आज शेयर कर रहा हूँ| त्यागी जी काव्य मंच पर अपनी उपस्थिति से अलग प्रकार का वातावरण सृजित करते थे| वे सामान्यतः खुद्दारी से भरी अभिव्यक्ति करते थे, वैसे प्रेम गीत भी उन्होंने बहुत सुंदर लिखे हैं| उनकी कुछ पंक्तियाँ जो अक्सर याद आती हैं, वे हैं…
-
दर्द पुराने निकले 5
कू -ए- क़ातिल में चले जैसे शहीदों का जुलूस,ख़्वाब यूं भीगती आँखों को सजाने निकले| अमजद इस्लाम अमजद
-
दर्द पुराने निकले 4
दश्त-ए-तन्हाई ए हिजरा में खड़ा सोचता हूं,हाय क्या लोग मेरा साथ निभाने निकले| अमजद इस्लाम अमजद
-
दर्द पुराने निकले 3
दिल ने एक ईंट से तामीर किया ताजमहल,तूने एक बात कही लाख फसाने निकले| अमजद इस्लाम अमजद
-
दर्द पुराने निकले 2
फ़स्ल-ए-गुल आई फ़िर एक बार असीनाने-वफ़ा,अपने ही खून के दरिया में नहाने निकले| अमजद इस्लाम अमजद
-
दर्द पुराने निकले!
चांद के साथ कई दर्द पुराने निकले,कितने गम थे जो तेरे गम के बहाने निकले| अमजद इस्लाम अमजद
-
सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूं !
आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय राहत इन्दौरी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| राहत जी अपने सबसे अलग अंदाज़ ए बयां के लिए प्रसिद्ध थे| जो एक अलग प्रकार का ‘पंच’ उनकी रचनाओं में आता था वो पाठकों और श्रोताओं का मन मोह लेता था| लीजिए प्रस्तुत है राहत इन्दौरी साहब…
-
खामोशी पहचाने कौन 5
किरन-किरन अलसाता सूरजपलक-पलक खुलती नींदेंधीमे-धीमे बिखर रहा हैज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन । निदा फाज़ली
-
खामोशी पहचाने कौन 4
मैं उसकी परछाई हूँ यावो मेरा आईना हैमेरे ही घर में रहता हैमेरे जैसा जाने कौन । निदा फाज़ली
-
खामोशी पहचाने कौन 3
जाने क्या-क्या बोल रहा थासरहद, प्यार, किताबें, ख़ूनकल मेरी नींदों में छुपकरजाग रहा था जाने कौन । निदा फाज़ली