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सारा जहां हमारा 4
होने को हम कलन्दर, आते हैं बोरी बन्दरहर एक कुली यहाँ का है राज़दाँ हमाराचीन-ओ-अरब हमारा …
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सारा जहां हमारा 3
जितनी भी बिल्डिंगें थीं, सेठों ने बाँट ली हैंफ़ुटपाथ बम्बई के हैं आशियाँ हमारा|चीन-ओ-अरब हमारा … फिर सुबह होगी
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सारा जहां हमारा 2
खोली भी छिन गई है, बेन्चें भी छिन गई हैंसड़कों पे घूमता है अब कारवाँ हमाराजेबें हैं अपनी खाली, क्यों देता वरना गालीवो सन्तरी हमारा, वो पासबाँ हमाराचीन-ओ-अरब हमारा … फिर सुबह होगी
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सारा जहां हमारा 1
चीन-ओ-अरब हमारा, हिन्दोस्ताँ हमारारहने को घर नहीं है, सारा जहाँ हमाराचीन-ओ-अरब हमारा … फिल्म : फिर सुबह होगी
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ज़िंदगी, कैसी है पहेली!
फिल्म आनंद, जिसमें एक जमे हुए सुपर स्टार राजेश खन्ना थे और उनके सामने ये थे अपेक्षाकृत नए कलाकार अमिताभ बच्चन, लेकिन इस फिल्म से ही अमिताभ बच्चन ने भी दर्शकों के मन पर अपनी अमिट छाप छोड़ी थी| फिल्म आनंद में बहुत से लाजवाब गाने थे, जिनमें मुकेश जी का गाया गीत – ‘कहीं…
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हाथ जल न जाए कहीं!
ये लोग होमो-हवन में यकीन रखते हैचलो यहां से चलें, हाथ जल न जाए कहीं| दुष्यंत कुमार
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सीढ़ी फिसल न जाए कहीं!
कभी मचान पे चढ़ने की आरज़ू उभरीकभी ये डर कि ये सीढ़ी फिसल न जाए कहीं| दुष्यंत कुमार
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उम्र नशे में निकल न जाए कहीं!
तमाम रात तेरे मैकदे में मय पी हैतमाम उम्र नशे में निकल न जाए कहीं| दुष्यंत कुमार
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पिघल न जाए कहीं !
यों मुझको ख़ुद पे बहुत ऐतबार है लेकिनये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं दुष्यंत कुमार