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हर कोई अपनी ही आवाज़ से काँप उठता है!
हर कोई अपनी ही आवाज़ से काँप उठता है,हर कोई अपने ही साये से हिरासाँ जाना| अहमद फ़राज़
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मुद्दतों से ये आलम न तवक़्क़ो न उम्मीद!
मुद्दतों से ये आलम न तवक़्क़ो न उम्मीद,दिल पुकारे ही चला जाता है जाना जाना| अहमद फ़राज़
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तेरा चेहरा था गुलिस्ताँ जाना!
अव्वल-अव्वल की मुहब्बत के नशे याद तो कर,बे-पिये भी तेरा चेहरा था गुलिस्ताँ जाना| अहमद फ़राज़
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तेरा एहसां जाना!
ज़िन्दगी तेरी अता थी सो तेरे नाम की है,हमने जैसे भी बसर की तेरा एहसां जाना| अहमद फ़राज़
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जल्द बदल जाते हैं इंसां जाना!
यूं ही मौसम की अदा देख के याद आया है,किस क़दर जल्द बदल जाते हैं इंसां जाना| अहमद फ़राज़
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तेरा पैमां जाना!
अब के तज्दीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जाना,याद क्या तुझ को दिलाएँ तेरा पैमां जाना| अहमद फ़राज़
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मैंने कुछ नहीं पूछा – रवींद्र नाथ ठाकुर
फिर से आज पुरानी ब्लॉग पोस्ट का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया…
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धमकियों की संस्कृति!
आज भारतीय क्रिकेट के बहाने कुछ बात कर लेते हैं| क्रिकेट तो वैसे ही अनिश्चितताओं का खेल है, कोई दावे के साथ नहीं कह सकता कि वह जीतेगा| भारतीय टीम का मामला उससे भी कुछ आगे का है| हमारी क्रिकेट टीम का ऐसा रिकॉर्ड है कि वे दुनिया की सबसे मजबूत टीम को भी हरा…
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प्रेम दीप
एक बार फिर दीपावली के बहाने से बात करते हैं| आप सभी जानते हैं दीपावली हिंदुओं का पवित्र पर्व है| हमारी प्राचीन संस्कृति जिसे हम सामान्यतः भारतीय अथवा व्यापक रूप से हिन्दू संस्कृति के नाम से जानते है, यह संस्कृति दुनिया में निराली है| कितने ही महान संत, महात्मा और धर्म गुरू हुए हैं हमारे…