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चंदन वन डूब गया!
छोटी से बड़ी हुई तरुओं की छायाएं,धुंधलाई सूरज के माथे की रेखाएं,मत बांधो आंचल में फूल चलो लौट चलें,वह देखो, कोहरे में चंदन वन डूब गया। किशन सरोज
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फिर चाहे दीवाना कर दे या अल्लाह!
एक बार फिर से आज मैं भारतीय उप महाद्वीप के मशहूर शायर क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| वास्तव में ये कवि, शायर और कलाकार ही होते हैं जिनको देश की सीमा में नहीं बांधा जा सकता| क़तील साहब की बहुत सी ग़ज़लों को अनेक भारतीय और पाकिस्तानी गायकों ने गाया…
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वो अठखेलियां कहाँ राही!
नजर-नवाज़ वो अठखेलियां कहाँ राही,चले है बाद-ए-सबा अब तो गुल कतरते हुए। मिलाप चंद राही
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तेरे शहर से गुज़रते हुए!
ये वाकया है तेरे शहर से गुज़रते हुए,हरे हुए हैं कई ज़ख्म दिल के भरते हुए। मिलाप चंद राही
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लरजना ज़ुबां का!
रवां-दवां थी, सियासत में रंग भरते हुए,लरज़ गई है ज़ुबां, दिल की बात करते हुए। मिलाप चंद राही
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अंग-अंग डोल गई रंग भरी बातें!
आज एक बार फिर से मधुर और सृजनशील गीतकार सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी ने जहां राष्ट्र और राष्ट्रभाषा को लेकर बहुत प्रेरक गीत लिखे हैं, वहीं उन्होंने बहुत नाजुक मनोभावों और मनः स्थितियों का चित्रण भी अपने गीतों में बड़ी कुशलता से किया है| लीजिए आज प्रस्तुत…
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एक दिल एक तमन्ना के सिवा कुछ भी नहीं !
आओ आने की करें बात, कि तुम आए हो,अब तुम आए हो तो मैं कौन सी शै नज़र करूँ,के मेरे पास सिवा मेहर–ओ–वफ़ा कुछ भी नहीं| एक दिल एक तमन्ना के सिवा कुछ भी नहीं | अली सरदार जाफ़री
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बिखर जाएगा, फिर रात का रंग!
तुम नहीं आओगे जब, फिर भी तो तुम आओगे,ज़ुल्फ़ दर ज़ुल्फ़ बिखर जाएगा, फिर रात का रंग,शब–ए–तन्हाई में भी लुत्फ़–ए–मुलाक़ात का रंग| अली सरदार जाफरी