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आपको धोखा हुआ होगा!
ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगामैं सज्दे में नहीं था आपको धोखा हुआ होगा । दुष्यंत कुमार
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अगले जनम की बात छोड़ो
स्वर्गीय किशन सरोज जी असाधारण प्रतिभा वाले परंतु अत्यंत सहज और शालीन व्यवहार वाले व्यक्ति थे| उनसे मिलना, उनसे बातें करना और सबसे ज्यादा उनका काव्य पाठ सुनना बहुत अच्छा लगता था| उनके अनेक गीत मैं दिल से पसंद करता हूँ और मैंने शेयर भी किए हैं| एक ऐसे स्वाभिमानी रचनाकार जो कहते हैं ‘नागफनी…
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आख़िरी सांस तक बेक़रार आदमी!
ज़िन्दगी का मुक़द्दर सफ़र दर सफ़र,आख़िरी सांस तक बेक़रार आदमी| निदा फ़ाज़ली
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अपनी ही लाश का ख़ुद मज़ार आदमी!
सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ,अपनी ही लाश का ख़ुद मज़ार आदमी| निदा फ़ाज़ली
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रहें मुबारक पीनेवाले, खुली रहे यह मधुशाला!
एक जमाने में कवि सम्मेलनों में अपने गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देने वाले स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी को आज याद करते हैं उनकी सबसे अधिक प्रसिद्ध कृति ‘मधुशाला’ के कुछ छंदों के माध्यम से, यह रचना उन्होंने उम्र खैयाम की रूबाइयों के आधार पर लिखी थी| यह रचना अपने आप में ही…
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हमें भी नींद आ जायेगी हम भी सो ही जायेंगे!
हमें भी नींद आ जायेगी हम भी सो ही जायेंगे,अभी कुछ बेक़रारी है सितारों तुम तो सो जाओ| क़तील शिफ़ाई
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यही क़िस्मत हमारी है सितारों तुम तो सो जाओ!
हमें तो आज की शब पौ फटे तक जागना होगा,यही क़िस्मत हमारी है सितारों तुम तो सो जाओ| क़तील शिफ़ाई