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अजीब आज की दुनिया का व्याकरण देखा!
ज़बाँ है और बयाँ और उसका मतलब और,अजीब आज की दुनिया का व्याकरण देखा| नीरज
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मुट्ठी में वो रतन देखा!
ख़रीदने को जिसे कम थी दौलत-ए-दुनिया,किसी कबीर की मुट्ठी में वो रतन देखा| नीरज
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मैं हूँ बनफूल भला मेरा कैसा खिलना, क्या मुरझाना!
स्वर्गीय भारत भूषण जी एक असाधारण प्रतिभा वाले कवि और गीतकार थे| भारत भूषण जी के गीतों को सुनना ही एक दिव्य अनुभव होता था| भारत भूषण जी के अनेक गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं, आज जो गीत शेयर कर रहा हूँ ‘बनफूल’ यह भी भारत भूषण जी का एक प्रसिद्ध गीत है|…
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ग़म-ए-हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे!
मैं अपनी ज़ात में नीलाम हो रहा हूँ “क़तील”,ग़म-ए-हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे। क़तील शिफ़ाई
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सारे जहाँ को है मालूम!
वो मेरा दोस्त है सारे जहाँ को है मालूम,दग़ा करे वो किसी से तो शर्म आये मुझे। क़तील शिफ़ाई
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जो मुस्कुरा के हमेशा गले लगाये मुझे!
वही तो सबसे ज़ियादा है नुक्ता-चीं मेरा, जो मुस्कुरा के हमेशा गले लगाये मुझे। क़तील शिफ़ाई