Category: Uncategorized
-
मिलना बहुत जरूरी है!
हमने देखा है बिछुड़ों कोमिलना बहुत जरूरी है।उतने ही हम पास रहेंगे,जितनी हममें दूरी है। डॉ. कुंवर बेचैन
-
धरती पर आते हैं पंछी!
सुबह हुए तो मिले रात-दिनमाना रोज बिछुड़ते हैं,धरती पर आते हैं पंछीचाहे ऊँचा उड़ते हैं,सीधे सादे रस्ते भी तोकहीं कहीं पर मुड़ते हैं,अगर हृदय में प्यार रहे तोटूट टूटकर जुड़ते हैं| (गीत-अंश) डॉ. कुंवर बेचैन
-
जिस मृग पर कस्तूरी है!
गीत अंश जंगल जंगल भटकेगा हीजिस मृग पर कस्तूरी है।उतने ही हम पास रहेंगे,जितनी हममें दूरी है। डॉ. कुंवर बेचैन
-
शाखों से फूलों की बिछुड़न!
गीत का अंश शाखों से फूलों की बिछुड़नफूलों से पंखुड़ियों की,आँखों से आँसू की बिछुड़नहोंठों से बाँसुरियों की,तट से नव लहरों की बिछुड़नपनघट से गागरियों की,सागर से बादल की बिछुड़नबादल से बीजुरियों की| डॉ. कुंवर बेचैन
-
जितनी हममें दूरी है!
मिलना और बिछुड़ना दोनोंजीवन की मजबूरी है।उतने ही हम पास रहेंगे,जितनी हममें दूरी है। डॉ. कुंवर बेचैन
-
हैं बहुत छोटे!
मेरे लिए गुरुतुल्य रहे स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी के बहुत से गीत मैंने पहले शेयर किए हैं| बहुत ही सरल स्वभाव वाले और अत्यंत सृजनशील रचनाकार थे डॉक्टर बेचैन जी, मुझे भी उनका स्नेह प्राप्त करने का अवसर मिला था| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी का यह नवगीत- जिंदगी की…