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कहीं जाँ से भी न जाओ!
इन्हीं ख़ुशगुमानियों में कहीं जां से भी न जाओ,वो जो चारागर नहीं है उसे ज़ख़्म क्यूं दिखाओ| अहमद फ़राज़
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तुम हो पहरेदार चमन के!
श्री उदय प्रताप सिंह जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| उदय प्रताप जी सांसद रहे हैं और जैसी मुझे जानकारी रही है, वे मुलायम सिंह जी के गुरू रहे हैं| मूल रूप से उदय प्रताप जी कवि हैं, सांसद भी बने लेकिन वे राजनैतिक व्यक्ति नहीं हैं| जहां तक मुझे याद है…
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शौक से अपनी नज़र के—
हम तुम्हारे सामने हैं, फिर तुम्हें डर काहे का,शौक से अपनी नज़र के वार कर दो यार तुम|
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ज़िंदगी के सताए हुए हैं!
इश्क़ में हम तुम्हें क्या बताएं, किस क़दर चोट खाए हुए हैं,मौत ने हमको बख्शा है लेकिन, ज़िंदगी के सताए हुए हैं|
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जब चली सर्द हवा!
आज दिल की चोटों, दिल टूटने आदि को लेकर कुछ शेर, गीत पंक्तियाँ शेयर करूंगा, शुरुआत जोश मलीहाबादी जी के एक शेर से- दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया,जब चली सर्द हवा, मैंने तुझे याद किया|
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मुझसे इक नज़्म का वादा है!
आज मैं गुलज़ार साहब की एक नज़्म शेयर कर रहा हूँ| एक अलग ही अंदाज़ में बात काही है इसमें गुलज़ार साहब ने, कुछ एहसास, कुछ अनुभव वे कहते हैं कि शायद तभी होंगे जब जीवन की अंतिम घड़ियां सामने हों, कवि की एक अलग तरह की अभिव्यक्ति है यह भी, आखिर कवि तो हमेशा…