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रुड्यार्ड किप्लिंग की कविता – ‘यदि’
आज पुरानी पोस्ट दोहरा रहा हूँ, लीजिए प्रस्तुत है मेरे द्वारा किए गए अनुवाद की यह पोस्ट| आज, मैं विख्यात ब्रिटिश कवि रुड्यार्ड किप्लिंग की एक कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। श्री किप्लिंग एक ब्रिटिश कवि थे लेकिन उनका जन्म ब्रिटिश शासन के दौरान, मुम्बई में ही हुआ था। यह उनकी अंग्रेजी भाषा…
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हम को तोहफे ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले!
आज एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ ज़नाब कैफ़ भोपाली साहब की लिखी हुई, कैफ़ भोपाली जी आज के समय के एक मशहूर और लोकप्रिय शायर हैं और इस ग़ज़ल में उन्होंने कुछ बहुत प्यारे शेर लिखे हैं| लीजिए प्रस्तुत है ज़नाब कैफ़ भोपाली साहब की यह ग़ज़ल – दाग दुनिया ने दिए जख़्म ज़माने…
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ये जुनूँ “फ़राज़” कब तक!
किसी बेवफ़ा की ख़ातिर ये जुनूँ “फ़राज़” कब तक,जो तुम्हें भुला चुका है, उसे तुम भी भूल जाओ| अहमद फ़राज़
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मेरी बात मान जाओ!
ये जुदाइयों के रस्ते बड़ी दूर तक गए हैं,जो गया वो फिर न लौटा, मेरी बात मान जाओ| अहमद फ़राज़
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तो अभी से छोड़ जाओ!
मेरे हमसफ़र पुराने मेरे अब भी मुंतज़िर हैं,तुम्हें साथ छोड़ना है तो अभी से छोड़ जाओ| अहमद फ़राज़
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उन्हें तुम भी क्यूँ सुनाओ!
वो कहानियाँ अधूरी, जो न हो सकेंगी पूरी,उन्हें मैं भी क्यूँ सुनाऊँ, उन्हें तुम भी क्यूँ सुनाओ| अहमद फ़राज़
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किसी दर्द को जगाओ!
ये उदासियों के मौसम कहीं रायेगाँ न जाएं,किसी ज़ख़्म को कुरेदो, किसी दर्द को जगाओ| अहमद फ़राज़