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वो ढूँढ रहा है मुझमें!
मेरे चहरे पे मुसलसल हैं निगाहें उसकी,जाने किस शख़्स को वो ढूँढ रहा है मुझमें| राजेश रेड्डी
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मिट्टी है, हवा है मुझमें!
आग है, पानी है, मिट्टी है, हवा है मुझमें,मुझको ये वहम नहीं है कि खु़दा है मुझमें| राजेश रेड्डी
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आज पहली बार!
स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी अपने समय में हिन्दी के प्रमुख कवियों में से एक थे, वे प्रतिष्ठित साप्ताहिक समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादक मण्डल में भी शामिल थे| सर्वेश्वर जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अन्य अनेक पुरस्कारों से अलंकृत किया गया था| लीजिए आज प्रस्तुत है सर्वेश्वर जी की यह कविता, जिसमें उन्होंने…