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मोचीराम!
स्वर्गीय सुदामा प्रसाद ‘धूमिल’ जी की एक लंबी कविता का एक अंश आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| धूमिल जी का अपना अलग ही अन्दाज़ था, आज की उनकी यह कविता उनकी प्रसिद्ध कविताओं में शामिल रही है, जिसमें वे एक मोची के माध्यम से कुछ महत्वपूर्ण बातें कह जाते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय…
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लक्षण सुबह के हैं!
मानो न मानो तुम ’उदय’ लक्षण सुबह के हैं,चमकीला तारा कोई नहीं आसमान में। उदय प्रताप सिंह
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क्या फ़ायदा संशोधनों से संविधान में!
जनतंत्र में जोंकों की कोई आस्था नहीं,क्या फ़ायदा संशोधनों से संविधान में। उदय प्रताप सिंह
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आईना अभिशाप है सूने मकान में!
तस्वीर के लिये भी कोई रूप चाहिये,ये आईना अभिशाप है सूने मकान में। उदय प्रताप सिंह
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आंख में पानी नहीं रहा!
इन बादलों की आंख में पानी नहीं रहा,तन बेचती है भूख एक मुट्ठी धान में। उदय प्रताप सिंह
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हिंदोस्ताँ कहां है अब!
ये रोज कोई पूछता है मेरे कान मेंहिंदोस्ताँ कहां है अब हिंदोस्तान में। उदय प्रताप सिंह
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तुमको ही याद किया, तुमको भुलाने के लिए!
आज मैं स्वर्गीय निदा फ़ाज़ली साहब की एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ | निदा फ़ाज़ली साहब की शायरी में एक सधुक्कड़ी अंदाज़ देखने को मिलता है| मैंने पहले भी निदा साहब की बहुत सी रचनाएं शेयर की हैं, क्या ग़ज़ब की शायरी और दोहे हैं निदा साहब के- ‘मैं रोया परदेस में, भीगा मां…