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बिछुए जितनी दूर कुँआरे पाँव से!
जितनी दूर नयन से सपना,जितनी दूर अधर से हँसना,बिछुए जितनी दूर कुँआरे पाँव से,उतनी दूर पिया तुम मेरे गाँव से! कुंवर बेचैन
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साहिल पे कश्तियों को—
गर दे गया दग़ा हमें तूफ़ान भी “क़तील”,साहिल पे कश्तियों को डूबोया करेंगे हम| क़तील शिफ़ाई
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जिस्मों को चाँदनी में —
जब दूरियों की आग दिलों को जलायेगी,जिस्मों को चाँदनी में भिगोया करेंगे हम| क़तील शिफ़ाई
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मिलकर जुदा हुए तो—
मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम,एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम| क़तील शिफ़ाई
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सूरज डूब गया बल्ली भर!
स्वर्गीय नरेंद्र शर्मा जी जाने माने साहित्यिक गीतकार थे, उन्होंने जहां अनेक साहित्यिक रचनाएं हमें दी हैं, वहीं फिल्मों के लिए भी उन्होंने अनेक मधुर गीत लिखे हैं| जहां तक मुझे याद है रामायण जैसे सीरियलों की तैयारी में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था| जैसे उनका एक गीत था – ‘ज्योति कलश छलके’, उन्होंने ‘द्रौपदी’,’सुवर्णा’…