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बूंद टपकी एक नभ से!
आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा बातचीत के लहजे में सहज भाव से चमत्कारिक बात कह जाते थे| इस कविता में भी, जैसे जब अचानक बारिश होती है, शुरू में एक बूंद से हमें इसकी सूचना मिलती है और फिर तेज…
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कल जाने क्या से क्या हो जाएं!
तू भी हीरे से बन गया पत्थर,हम भी कल जाने क्या से क्या हो जाएं| अहमद फराज़
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बौड़म जी की बस-यात्रा!
प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि अशोक चक्रधर जी एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी ने कुछ कविताओं में ‘बौड़म जी’ नामक एक कैरेक्टर के माध्यम से अपनी बात कही है| आज की इस कविता में बौड़म जी की बस यात्रा की बात कही गई है, जो बस यात्रा का अनुभव न होने के कारण…
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घर का निशां नहीं मिलता!
चिराग़ जलते ही बीनाई बुझने लगती है,खुद अपने घर में ही घर का निशां नहीं मिलता| निदा फ़ाज़ली
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सब अपने आप में गुम हैं!
ये क्या अज़ाब है सब अपने आप में गुम हैं,ज़बां मिली है मगर हमज़बां नहीं मिलता| निदा फ़ाज़ली
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मकां नहीं मिलता!
कहाँ चिराग़ जलायें कहां गुलाब रखें,छतें तो मिलती हैं लेकिन मकां नहीं मिलता| निदा फ़ाज़ली