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जाने न नज़र पहचाने जिगर!
एक बार फिर से मैं, हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत राज कपूर साहब की फिल्म ‘आह’ के लिए लिखा था हसरत जयपुरी जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था शंकर-जयकिशन की प्रसिद्ध जोड़ी ने| लीजिए…
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कोई फ़ैसला तो सुना दें!
सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा दें,मगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें| सुदर्शन फ़ाकिर
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चेहरे से पर्दा हटा दें!
क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे,चलो उनके चेहरे से पर्दा हटा दें| सुदर्शन फ़ाकिर
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ख़ुदा को भुला दें!
अगर ख़ुद को भूले तो, कुछ भी न भूले,कि चाहत में उनकी, ख़ुदा को भुला दें| सुदर्शन फ़ाकिर
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ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें!
हर एक मोड़ पर हम ग़मों को सज़ा दें,चलो ज़िन्दगी को मोहब्बत बना दें| सुदर्शन फ़ाकिर
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ठंडा लोहा – धर्मवीर भारती
एक बार फिर से आज मैं स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| धर्मवीर भारती जी हिन्दी के श्रेष्ठ उपन्यास एवं कहानी लेखक, निबंध लेखक, कवि और गीतकार के अलावा धर्मयुग के जाने-माने संपादक थे| आज मैं भारती जी की एक प्रसिद्ध रचना ‘ठंडा लोहा’ शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज…
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जंग टलती है तो बेहतर है !
इसलिए ऐ शरीफ इंसानों ,जंग टलती है तो बेहतर है !आप और हम सभी के आंगन में ,शमा जलती रहे तो बेहतर है ! साहिर लुधियानवी
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युद्ध-4
जंग तो खुद ही एक मसअला है,जंग क्या मसअलों का हल देगी ?आग और खून आज बख्शेगी,भूख और एहतयाज कल देगी ! साहिर लुधियानवी