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आग में बादल नहा लिए!
सुख, जैसे बादलों में नहाती हों बिजलियां,दुख, बिजलियों की आग में बादल नहा लिए| कुंवर बेचैन
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कांटे चुभा लिए!
चाहा था एक फूल ने तड़पे उसी के पास,हमने खुशी के पाँवों में कांटे चुभा लिए| कुंवर बेचैन
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आ अब लौट चलें!
आज फिर से मैं, हम सबके प्रिय गायक मुकेश जी और लता मंगेशकर जी के गाये एक युगल गीत के बोल प्रस्तुत कर रहा हूँ, यह गीत राज कपूर जी की अद्वितीय फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ के लिए लिखा था शैलेन्द्र जी ने और इसका मधुर संगीत तैयार किया था शंकर-जयकिशन की…