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कभी पहले जैसे, मिला न हो!
डॉक्टर बशीर बद्र, आज की उर्दू शायरी में एक जाना-पहचाना नाम है| उनको विशेष रूप से शायरी में एक्सपेरीमेंट करने के लिए जाना जाता है| अनेक शेर उनके लोगों के ज़ेहन में छाए रहते हैं, जैसे ‘उजाले अपनी यादों के, हमारे साथ रहने दो’, ‘कोई हाथ भी न मिलाएगा, जो गले मिलोगे तपाक से, ये…
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तुझको भुला कर देखूं !
याद आता है के पहले भी कई बार यूं हीमैने सोचा था के मैं तुझको भुला कर देखूं | राहत इन्दौरी
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तेरे साये में आ कर देखूं!
तेरे बारे में सुना ये है के तू सूरज हैमैं ज़रा देर तेरे साये में आ कर देखूं | राहत इन्दौरी
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तेरी तस्वीर लगा कर देखूं!
दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता हैसोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूं | राहत इन्दौरी
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अगर होश में आकर देखूं!
मैने देखा है ज़माने को शराबें पी करदम निकल जाये अगर होश में आकर देखूं | राहत इन्दौरी
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और तुझे तेरी निगाहों से–
कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत मेंऔर तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूं | राहत इन्दौरी
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गीत-विहग उतरा!
आज एक बार फिर से मैं स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत रंजक जी की प्रारंभिक प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है और यह उनके एक नवगीत संकलन का शीर्षक गीत था| प्रकृति के कुछ सुंदर चित्र इस गीत में उकेरे गए हैं|| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय…
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वो खत जो तुम्हें दे न सके–
अब भी किसी दराज में मिल जाएंगे तुम्हें,वो खत जो तुम्हें दे न सके लिख लिखा लिए। कुंवर बेचैन