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आवाज़ में असर के लिए!
वो मुतमइन हैं कि पत्थर पिघल नहीं सकता,मैं बेक़रार हूँ आवाज़ में असर के लिए| दुष्यंत कुमार
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आदमी का ख़्वाब सही!
ख़ुदा नहीं न सही, आदमी का ख़्वाब सही,कोई हसीन नज़ारा तो है नज़र के लिए| दुष्यंत कुमार
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मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए!
न हो कमीज़ तो पाँवों से पेट ढँक लेंगे,ये लोग कितने मुनासिब हैं इस सफ़र के लिए| दुष्यंत कुमार
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साये में धूप लगती है
यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है,चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए| दुष्यंत कुमार
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चिराग़ाँ हर एक घर के लिए!
कहां तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए,कहां चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए| दुष्यंत कुमार
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पूछो मेरे दिल से!
आज एक गीत फिल्म ‘अनिता’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी के मधुर स्वर में, इसका संगीत तैयार किया है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की संगीतमय जोड़ी ने और गीत लिखा था राजा मेहदी आली खां साहब ने| मुझे यह गीत भी विशेष रूप से प्रिय है और आज भी यह हमारे मन में गूँजता रहता है|…
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भूलना आसान न था!
तुमसे छूट कर भी तुम्हें भूलना आसान न था,तुमको ही याद किया तुमको भुलाने के लिए| निदा फ़ाज़ली
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ताश के पत्तों-सी सजी है दुनिया!
मेज़ पर ताश के पत्तों-सी सजी है दुनिया,कोई खोने के लिए है कोई पाने के लिए| निदा फ़ाज़ली
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मोतियों वाले मौसम!
यूँ लुटाते न फिरो मोतियों वाले मौसम,ये नगीने तो हैं रातों को सजाने के लिए| निदा फ़ाज़ली
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कुछ हैं ज़माने के लिए!
हम हैं कुछ अपने लिए कुछ हैं ज़माने के लिए,घर से बाहर की फ़ज़ा हँसने-हँसाने के लिए| निदा फ़ाज़ली