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कर दिया तूने अगर–
ख़ुद को मैं बांट न डालूं कहीं दामन-दामन,कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको| क़तील शिफ़ाई
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आज सता ले मुझको!
कल की बात और है मैं अब सा रहूँ या न रहूँ,जितना जी चाहे तेरा आज सता ले मुझको| क़तील शिफ़ाई
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देखा नहीं आईने से आगे कुछ भी!
तूने देखा नहीं आईने से आगे कुछ भी,ख़ुदपरस्ती में कहीं तू न गँवा ले मुझको| क़तील शिफ़ाई
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नाम मेरा लेके बुला ले मुझको!
मैं समंदर भी हूँ, मोती भी हूँ, ग़ोताज़न भी,कोई भी नाम मेरा लेके बुला ले मुझको| क़तील शिफ़ाई
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पूछने आया है वफ़ा के मानी!
मुझसे तू पूछने आया है वफ़ा के मानी,ये तेरी सादादिली मार न डाले मुझको| क़तील शिफ़ाई
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नसीब अपना बना ले मुझको!
अपने हाथों की लकीरों में बसा ले मुझको,मैं हूँ तेरा नसीब अपना बना ले मुझको| क़तील शिफ़ाई
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सपना है अभी भी!
हिन्दी साहित्य की प्रत्येक विधा में अद्वितीय लेखन करने वाले, भले ही वह उपन्यास, कहानी और निबंध लेखन हो तथा हिन्दी कविता के गीत, नवगीत और अगीत सभी क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ने वाले और धर्मयुग पत्रिका के यशस्वी संपादक स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| आज उनकी…