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नग़मों की खिलाती कलियां चुनने वाले!
कल और आएंगे नग़मों की खिलाती कलियां चुनने वाले,मुझसे बहते कहने वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले| साहिर लुधियानवी
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मिल जाना क्या, न मिलना क्या!
उसका मिल जाना क्या, न मिलना क्याख्वाब-दर-ख्वाब कुछ मज़ा ही नहीं। कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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इक पीर पली मीलों तक!
आज एक बार फिर मैं, मेरे लिए गुरु तुल्य रहे स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| डॉक्टर कुँवर बेचैन जी अत्यंत सरल हृदय व्यक्ति और श्रेष्ठ रचनाकार थे| उनसे मिलने और उनका कविता पाठ सुनने का अनुभव स्मरणीय होता था| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की…
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किसी जुर्म की सज़ा ही नहीं!
धन के हाथों बिके हैं सब क़ानूनअब किसी जुर्म की सज़ा ही नहीं। कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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कुछ बचा ही नहीं!
इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं,मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं| कृष्ण बिहारी ‘नूर’