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किस तरह खेलना छोड़ दे!
तेरी अंगड़ाइयों से मिली, ज़ेहन-ओ- दिल को नई रोशनी,तेरे जलवों से मेरी नज़र, किस तरह खेलना छोड़ दे| हसन काज़मी
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मोरनी नाचना छोड़ दे!
तेरी आँखों से कलियां खिलीं, तेरे आँचल से बादल उड़े,देख ले जो तेरी चाल को, मोरनी नाचना छोड़ दे| हसन काज़मी
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तू मुझे सोचना छोड़ दे!
खूबसूरत हैं आँखे तेरी, रात को जागना छोड़ दे,खुद ब खुद नींद आ जायेगी, तू मुझे सोचना छोड़ दे| हसन काज़मी
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लहजे को भी बाज़ारी रखो!
ले तो आए शाइरी बाज़ार में ‘राहत’ मियां,क्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो| राहत इन्दौरी
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न मैं चुप हूँ न गाता हूँ !
आज बिना किसी भूमिका के, हमारे लोकप्रिय पूर्व प्रधान मंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी एक सहृदय मनुष्य और मंजे हुए राजनेता होने के साथ ही एक श्रेष्ठ कवि भी थे| लीजिए प्रस्तुत है वाजपेयी जी की एक कविता, जो मनाली…
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पत्थर ज़रा भारी रखो!
ये हवाएं उड़ न जाएं ले के काग़ज़ का बदन,दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो| राहत इन्दौरी
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ख़्वाब मेयारी रखो!
ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ायम रहे,नींद रखो या न रखो ख़्वाब मेयारी रखो| राहत इन्दौरी
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मौत से यारी रखो!
एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो,दोस्ताना ज़िंदगी से, मौत से यारी रखो| राहत इन्दौरी
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सफ़र जारी रखो!
राह के पत्थर से बढ़कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें,रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो| राहत इन्दौरी