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संगीत अमर कर दो!
आकाश का सूनापन,मेरे तनहा मन में|पायल छनकाती तुम,आजाओ जीवन में|साँसें देकर अपनी,संगीत अमर कर दो|होंठों से छूलो तुम … इंदीवर
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जीत अमर कर दो!
जग ने छीना मुझसे,मुझे जो भी लगा प्यारा|सब जीता किये मुझसे,मैं हर दम ही हारा|तुम हार के दिल अपना,मेरी जीत अमर कर दो|होंठों से छूलो तुम … इंदीवर
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तो देखे केवल मन!
न उम्र की सीमा हो,न जनम का हो बंधन|जब प्यार करे कोई,तो देखे केवल मन|नई रीत चलाकर तुम,ये रीत अमर कर दो|होंठों से छूलो तुम … इंदीवर
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प्रीत अमर कर दो!
होंठों से छू लो तुम,मेरा गीत अमर कर दो|बन जाओ मीत मेरे,मेरी प्रीत अमर कर दो| इंदीवर
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प्रसाद जी की रचना ‘आंसू’ का अंश
छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ – स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी का साहित्य, हिन्दी काव्य जगत की एक अमूल्य धरोहर है| आज मैं प्रसाद जी के प्रमुख काव्य-ग्रंथ- ‘आँसू’ का प्रारंभिक अंश आप सभी के साथ शेयर कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है प्रसाद जी की काव्य-रचना ‘आँसू’ का यह अंश – इस करुणा कलित…
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जाम ही मांगना छोड़ दे!
तेरी आँखों से छलकी हुई, जो भी इक बार पी ले अगर,फिर वो मैख़ार ऐ साक़िया, जाम ही मांगना छोड़ दे| हसन काज़मी
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किस तरह खेलना छोड़ दे!
तेरी अंगड़ाइयों से मिली, ज़ेहन-ओ- दिल को नई रोशनी,तेरे जलवों से मेरी नज़र, किस तरह खेलना छोड़ दे| हसन काज़मी
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मोरनी नाचना छोड़ दे!
तेरी आँखों से कलियां खिलीं, तेरे आँचल से बादल उड़े,देख ले जो तेरी चाल को, मोरनी नाचना छोड़ दे| हसन काज़मी
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तू मुझे सोचना छोड़ दे!
खूबसूरत हैं आँखे तेरी, रात को जागना छोड़ दे,खुद ब खुद नींद आ जायेगी, तू मुझे सोचना छोड़ दे| हसन काज़मी
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लहजे को भी बाज़ारी रखो!
ले तो आए शाइरी बाज़ार में ‘राहत’ मियां,क्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो| राहत इन्दौरी