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प्यार के ज़ख्म अमानत हैं!
ये जरूरी नहीं हर शख्स मसीहा ही हो,प्यार के ज़ख्म अमानत हैं दिखाया न करो| मोहसिन नक़वी
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राम की शक्ति पूजा
एक बार फिर छायावाद युग में लौटते हैं और आज मैं उस युग के प्रमुख स्तंभ और हिन्दी कविता के गौरव स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की एक प्रमुख रचना ‘राम की शक्तिपूजा’ का प्रारंभिक और अंतिम भाग प्रस्तुत कर रहा हूँ| इस रचना में प्रसंग है कि श्रीराम जी का जब महाबली रावण से…
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अफ़साना बना लेते हैं!
लोग हर बात का अफ़साना बना लेते हैं,सबको हालात की रूदाद सुनाया न करो। मोहसिन नक़वी
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प्यार छुपाया न करो!
रेत पर लिख के मेरा नाम मिटाया न करो,आँख सच बोलती है प्यार छुपाया न करो। मोहसिन नक़वी
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यह मंदिर का दीप!
आज एक बार फिर छायावाद युग में लौटते हैं और उस युग की प्रमुख कवियित्री स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| महादेवी जी के गीत आज भी सहृदय पाठकों का मन मोहते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी का यह गीत – यह मन्दिर का दीप इसे…