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कलम आज उनकी जय बोल!
आज मैं राष्ट्रप्रेम और ओज के कवि, स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की एक प्रसिद्ध कविता शेयर कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीदों को नमन किया है| दिनकर जी ने जहां ‘मेरे नगपति, मेरे विशाल’ जैसी पंक्तियाँ लिखीं वहीं उन्होंने ‘उर्वशी’ जैसी महान रचना भी लिखी, जो…
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पढ़ते हैं सब ताज़ा ग़ज़ल मेरी!
दम साध के पढ़ते हैं सब ताज़ा ग़ज़ल मेरी,किस लहजे में अबके मैं क्या बात बरतता हूँ । राजेश रेड्डी
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महक जाते हैं चाँद-सितारे भी!
उस रात महक जाते हैं चाँद-सितारे भी,मैं नींद में ख़्वाबों को जिस रात बरतता हूँ । राजेश रेड्डी
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सदमात बरतता हूँ !
कुछ और बरतना तो आता नहीं शे’रों में,सदमात बरतता था, सदमात बरतता हूँ । राजेश रेड्डी
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जो ज़ख्म मेरे दिल को!
मिलते रहे दुनिया से जो ज़ख्म मेरे दिल को,उनको भी समझकर मैं सौग़ात, बरतता हूँ । राजेश रेड्डी
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यादों के लम्हात बरतता हूँ !
कंजूस कोई जैसे गिनता रहे सिक्कों को,ऐसे ही मैं यादों के लम्हात बरतता हूँ । राजेश रेड्डी
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अपने हालात बरतता हूँ!
खुलते भी भला कैसे आँसू मेरे औरों पर,हँस-हँस के जो मैं अपने हालात बरतता हूँ । राजेश रेड्डी
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बनकर सुक़रात, बरतता हूँ!
इक ज़हर के दरिया को दिन-रात बरतता हूँ ।हर साँस को मैं, बनकर सुक़रात, बरतता हूँ । राजेश रेड्डी
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क़लम बेदाग है तो ज़िन्दगी है !
मेरे अत्यंत प्रिय रहे सृजनधर्मी नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक और गीत आज शेयर कर रहा हूँ| रमेश रंजक जी ने वास्तव में नवगीत विधा में नई ऊँचाइयाँ हासिल की थीं और उनसे हमेशा चमत्कारिक अभिव्यक्ति की उम्मीद बनी रहती थी| काव्यधर्म का वे हमेशा कड़ाई से पालन करते थे और उन्होंने अनेक…