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उसको भूल जाने में!
दूसरी कोई लड़की, ज़िंदगी में आएगी,कितनी देर लगती है, उसको भूल जाने में| बशीर बद्र
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फ़ाख़्ता की मजबूरी!
फ़ाख़्ता की मजबूरी ,ये भी कह नहीं सकती,कौन साँप रखता है, उसके आशियाने में| बशीर बद्र
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दिल को दिल बनाने में!
हर धड़कते पत्थर को, लोग दिल समझते हैं,उम्र बीत जाती है, दिल को दिल बनाने में| बशीर बद्र
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तुम तरस नहीं खाते–
लोग टूट जाते हैं, एक घर बनाने में,तुम तरस नहीं खाते, बस्तियाँ जलाने में| बशीर बद्र
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आ गए किस द्वीप में हम!
एक बार फिर से मैं आज माननीय सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी ने जहां राष्ट्रप्रेम, राजभाषा प्रेम और रूमानी प्रेम के एक से एक बढ़कर गीत लिखे हैं वहीं मानवीय सरोकारों को भी बड़ी सशक्त अभिव्यक्ति दी है| लीजिए आज प्रस्तुत है माननीय सोम ठाकुर जी का, आज…