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रेशम-ओ-किम्ख्वाब लगे!
एक चुपचाप सी लड़की, न कहानी न ग़ज़ल,याद जो आये कभी रेशम-ओ-किम्ख्वाब लगे| निदा फ़ाज़ली
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कोई नया ख्वाब लगे!
कभी बादल, कभी कश्ती, कभी गर्दाब लगे,वो बदन जब भी सजे कोई नया ख्वाब लगे| निदा फ़ाज़ली
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गीत फूल-फूले!
स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| रंजक जी ने नवगीत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई थी और कुछ अद्भुद नवगीत उन्होंने हमें दिए हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत, जो गीतों की मोहकता और प्रभाव विस्तार को लेकर ही है –…
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जिस दिन भी बिछड़ गया मीता!
आज एक बार फिर से मैं अपने अत्यंत प्रिय गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण जी का एक प्रेम गीत शेयर कर रहा हूँ| इस गीत में भारत भूषण जी ने प्रेम की अनूठी अभिव्यक्ति की है| भावुकता का अपना सौन्दर्य है और जो लोग भावुक हैं शायद वे ही इसे समझ सकते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत…
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अंगारे न देख!
राख़ कितनी राख़ है, चारों तरफ बिख़री हुई,राख़ में चिनगारियाँ ही देख अंगारे न देख । दुष्यंत कुमार