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रुक जा रात ठहर जा रे चंदा!
स्वर्गीय शैलेन्द्र जी का एक सुंदर गीत आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| फिल्म- ‘दिल एक मंदिर’ के लिए इस गीत का संगीत शंकर जयकिशन की सुरीली जोड़ी ने दिया था और सुर सम्राज्ञी स्वर्गीय लता मंगेशकर जी ने अपनी मधुर वाणी में गाकर इस गीत को अमर कर दिया है| लीजिए आज प्रस्तुत हैं इस…
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दरिया में बहा दें यादें!
काश मुमकिन हो कि इक काग़ज़ी कश्ती की तरह,ख़ुदफरामोशी के दरिया में बहा दें यादें| अहमद फ़राज़
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दुःख याद दिला दें यादें!
जिस तरह आज ही बिछड़े हों बिछड़ने वाले,जैसे इक उम्र के दुःख याद दिला दें यादें| अहमद फ़राज़
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और वही यादें-यादें!
आज फिर दिल ने कहा आओ भुला दें यादें,ज़िंदगी बीत गई और वही यादें-यादें| अहमद फ़राज़
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कौन जाने कि चाहतो में फ़राज़!
कौन जाने कि चाहतो में फ़राज़,क्या गंवाया है क्या मिला है मुझे| अहमद फ़राज़
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तू है जहाँ, वहाँ आ पाना!
आज स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का एक सुंदर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| काव्य रचनाएं स्वयं अपना परिचय देती हैं, वैसे गीत अधिकतर भावुकता का ही व्यापार होते हैं, जैसे नीरज जी ने भी लिखा था- ‘हूँ बहुत नादान करता हूँ ये नादानी, बेचकर खुशियां खरीदूँ आँख का पानी’| खैर आज आप इस गीत में…