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तोरा मन दर्पण कहलाये!
आज स्वर्गीय साहिर लुधियानवी जी का लिखा एक सुंदर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| फिल्म- ‘काजल’ के लिए इस गीत का संगीत रवि जी ने दिया था और इसको आशा भौंसले जी ने अपनी मधुर वाणी में गाया है जो आज तक हमारे मन में गूँजता है| लीजिए आज प्रस्तुत हैं इस मधुर गीत के…
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रिहा होने से डरता है!
अज़ब ये ज़िन्दगी की क़ैद है, दुनिया का हर इन्सां,रिहाई मांगता है और रिहा होने से डरता है| राजेश रेड्डी
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कब ख़ुदा होने से डरता है!
न बस में ज़िन्दगी इसके न क़ाबू मौत पर इसका,मगर इन्सान फिर भी कब ख़ुदा होने से डरता है| राजेश रेड्डी
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बड़ा होने से डरता है!
मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम-सा बच्चा,बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से डरता है| राजेश रेड्डी
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फ़ना होने से डरता है!
यहाँ हर शख़्स हर पल हादिसा होने से डरता है,खिलौना है जो मिट्टी का फ़ना होने से डरता है| राजेश रेड्डी