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हमको कोई घर ले जाए!
हम भी हैं बनवास में लेकिन राम नहीं हैं राहीआए अब समझाकर हमको कोई घर ले जाए ।। राही मासूम रज़ा
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जाने क्या बातें करते हैं!
इतने शोर में दिल से बातें करना है नामुमकिनजाने क्या बातें करते हैं आपस में हमसाए।। राही मासूम रज़ा
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जब सच बोलें तब झूठे कहलाए!
हम भी कैसे दीवाने हैं किन लोगों में बैठे हैंजान पे खेलके जब सच बोलें तब झूठे कहलाए। राही मासूम रज़ा
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जिनमें नींद ना आए!
क्या वो दिन भी दिन हैं, जिनमें दिन भर जी घबराएक्या वो रातें भी रातें हैं जिनमें नींद ना आए। राही मासूम रज़ा
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प्रेम की गंगा बहाते चलो!
आज पंडित भारत व्यास जी का लिखा एक सुंदर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| भारत व्यास जी ने हमारी फिल्मों को बहुत से अमर गीत दिए हैं| आज मैं फिल्म- ‘संत ज्ञानेश्वर’ का यह गीत शेयर कर रहा हूँ जिसका संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल जी की प्रसिद्ध जोड़ी ने दिया था और इसको लता मंगेशकर जी…
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हम जान हार गुज़रे!
तूने भी हमको देखा, हमने भी तुझको देखा,तू दिल ही हार गुज़रा हम जान हार गुज़रे। मीना कुमारी
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कोई तो पार गुज़रे!
बहती हुई ये नदिया घुलते हुए किनारे,कोई तो पार उतरे कोई तो पार गुज़रे| मीना कुमारी
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एक दिन बहार गुज़रे!
बैठे हैं रास्ते में दिल का खंडहर सजाकर,शायद इसी तरफ़ से एक दिन बहार गुज़रे| मीना कुमारी
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कोई कोहराम नहीं होता!
दिन डूबे हैं या डूबे बारात लिये कश्ती,साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता| मीना कुमारी
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किस्मत में ईनाम नहीं होता!
हँस- हँस के जवां दिल के, हम क्यों न चुनें टुकडे़,हर शख्स़ की किस्मत में ईनाम नहीं होता| मीना कुमारी