Category: Uncategorized
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सभी कुछ मुआफ है, जानी!
वो मेरी पीठ में खंज़र उतार सकता है,के जंग में तो सभी कुछ मुआफ है, जानी| राहत इन्दौरी
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लहरों का निमंत्रण!
एक बार फिर से मैं आज स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी की एक लंबी कविता का अंश शेयर कर रहा हूँ| सीनियर बच्चन जी, हाँ यही कहना होगा क्योंकि उनके सुपुत्र आज सदी के महानायक हैं| अपने समय के प्रमुख हिन्दी कवियों में हरिवंश राय बच्चन जी शामिल थे उनके गीतों पर श्रोतागण झूम-झूम जाते…
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वफ़ा का नाम यहाँ!
वफ़ा का नाम यहाँ हो चुका बहुत बदनाम,मैं बेवफा हूँ मुझे ऐतराफ है, जानी| राहत इन्दौरी
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पुराना लिहाफ है, जानी!
हमें चमकती हुई सर्दियों का खौफ नहीं,हमारे पास पुराना लिहाफ है, जानी| राहत इन्दौरी
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मैदान साफ़ है, जानी!
हवा खुद अब के हवा के खिलाफ है, जानी,दिए जलाओ के मैदान साफ़ है, जानी| राहत इन्दौरी
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कट-कट के सहर तक पहुँची!
तुम तो सूरज के पुजारी हो तुम्हे क्या मालूम,रात किस हाल में कट-कट के सहर तक पहुँची| राहत इन्दौरी
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तेरे घर तक पहुँची!
मैं तो सोया था मगर बारहा तुझसे मिलने,जिस्म से आँख निकलकर तेरे घर तक पहुँची| राहत इन्दौरी
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मेरे सर तक पहुँची!
मैंने पूछा था कि ये हाथ में पत्थर क्यों है,बात जब आगे बढी़ तो मेरे सर तक पहुँची| राहत इन्दौरी
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ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो!
तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुँची,ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर तक पहुँची| राहत इन्दौरी
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कुछ देर और बैठो!
आज फिर से मैं स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी अपने समय के प्रमुख हिन्दी कवियों में शामिल थे और साप्ताहिक समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादन से संबद्ध थे| लीजिए आज प्रस्तुत है सर्वेश्वर जी की यह कविता, जो प्रेमी-प्रेमिका की एक मन के स्तर पर घटनापूर्ण…