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खरे सोने का भाव ऐसा था!
ख़रीदते तो ख़रीदार ख़ुद ही बिक जाते,तपे हुए खरे सोने का भाव ऐसा था| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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चारों तरफ से दबाव ऐसा था!
कुछ ऐसी साँसें भी लेनी पड़ीं जो बोझल थीं,हवा का चारों तरफ से दबाव ऐसा था| कृष्ण बिहारी ‘नूर’
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प्यास के क्षण मांगता हूँ!
आज मैं श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी गिनती हिन्दी के श्रेष्ठ कवियों में होती है| आपने बहुत से सुंदर गीतों और ग़ज़लों की सौगात हमें दी है| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत जिसमें कवि ने कुछ अलग ही तरह की अभिलाषा अपने…
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अपने सीने में दो गज़ ज़मीं बांधकर!
अपने सीने में दो गज़ ज़मीं बांधकर,आसमानों का ज़र्फ़ आज़माया करो| राहत इन्दौरी
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फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो!
शाम के बाद जब तुम सहर देख लो,कुछ फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो| राहत इन्दौरी
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बारिशों में पतंगें उड़ाया करो!
ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे,बारिशों में पतंगें उड़ाया करो| राहत इन्दौरी