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कुछ अपनी अय्यारी है!
औरों जैसे होकर भी हम बाइज़्ज़त हैं बस्ती में,कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है| निदा फ़ाज़ली
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बहुत बड़ी फ़नकारी है!
मन बैरागी, तन अनुरागी, क़दम-क़दम दुश्वारी है,जीवन जीना सहल न जानो, बहुत बड़ी फ़नकारी है| निदा फ़ाज़ली
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अपनी उड़ान में रखना!
चमकते चाँद-सितारों का क्या भरोसा है,ज़मीं की धूल भी अपनी उड़ान में रखना | निदा फ़ाज़ली
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अपने बयान में रखना!
जो देखती हैं निगाहें वही नहीं सब कुछ,ये एहतियात भी अपने बयान में रखना | निदा फ़ाज़ली
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मंज़िल गुमान में रखना!
सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना,क़दम यकीन में, मंज़िल गुमान में रखना | निदा फ़ाज़ली
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अक्षरा से!
अपने सेवाकाल के दौरान मुझे, कवि सम्मेलनों का आयोजन करने के कारण हिन्दी के अनेक श्रेष्ठ कवियों/ गीतकारों के संपर्क में आने का अवसर मिला| आज उनमें से ही एक श्रेष्ठ नवगीतकार पटना के श्री सत्यनारायण जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सत्यनारायण जी पटना में शत्रुघ्न सिन्हा जी के पडौसी और मित्र…
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सूरज से निकलते रहिए!
हो के मायूस न यूँ शाम से ढलते रहिए, ज़िंदगी भोर है सूरज से निकलते रहिए| कुँअर बेचैन
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आपके भी दिल ने बात की!
राहों से जितने प्यार से मंज़िल ने बात की, यूँ दिल से मेरे आपके भी दिल ने बात की| कुँअर बेचैन