Category: Uncategorized
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माँ दुआ करती हुई!
जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है,माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है| मुनव्वर राना
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कहीं नहीं बचे!
आज एक बार फिर से मैं अपनी तरह के अनूठे कवि स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| भवानी दादा की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं और उनकी रचनाओं और अनूठे व्यक्तित्व के बारे में भी बातें की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र…
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सियासत से तबाही का!
बड़ा गहरा तअल्लुक़ है सियासत से तबाही का,कोई भी शहर जलता है तो दिल्ली मुस्कुराती है| मुनव्वर राना
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फिर भी मुस्कुराती है!
हमें ऐ ज़िन्दगी तुझ पर हमेशा रश्क आता है,मसायल से घिरी रहती है फिर भी मुस्कुराती है| मुनव्वर राना
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तितली मुस्कुराती है!
चमन में सुबह का मंज़र बड़ा दिलचस्प होता है,कली जब सो के उठती है तो तितली मुस्कुराती है| मुनव्वर राना
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घर आ के बेटी मुस्कुराती है!
तभी जाकर कहीं माँ-बाप को कुछ चैन पड़ता है,कि जब ससुराल से घर आ के बेटी मुस्कुराती है| मुनव्वर राना
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तभी तो देख कर पोते को!
उछलते खेलते बचपन में बेटा ढूँढती होगी,तभी तो देख कर पोते को दादी मुस्कुराती है| मुनव्वर राना
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हिन्दी मुस्कुराती है!
लिपट जाता हूँ माँ से और मौसी मुस्कुराती है,मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिन्दी मुस्कुराती है| मुनव्वर राना
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अगर मुझे न मिली तुम!
आज साहिर लुधियानवी साहब का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म – ‘काजल’ के लिए महेंद्र कपूर जी और आशा भौंसले जी ने गाया था| इसका मधुर संगीत तैयार किया था रवि जी ने| लीजिए प्रस्तुत है, फिल्म- काजल के लिए साहिर लुधियानवी साहब का लिखा और…
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जैसा कहते हो सब वैसा वैसा होगा!
मेरे कुछ पल मुझको दे दो बाकी सारे दिन लोगो,तुम जैसा जैसा कहते हो सब वैसा वैसा होगा| जावेद अख़्तर